मीडिया का जगधारीकरण

Cartoon by Ganesh from ARCHIVE
ये कालाधन-वालाधन क्या है? किसी को मालूम है क्या?
राम-राम, बहुत बोले अब घर जाइये। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का झाडू डांस चल रहा है। बहुत पहले की बात है। जब वह प्रधानमंत्री नहीं बने थे तब की। तब वह गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे। केमछो मित्र अब घर जाइये। यहां कुछ भी नहीं मिलेगा।
जगधारी जी की बात ही कुछ अलग है। मोदी जी और जगधारी जी में जमीन आसमान का फर्क है। रामभरोसे सब कुछ चल रहा है। यह उस जमाने की बात है, जब गर्व से बोलो हम हिन्दू का स्लोगन खूब उछला था।
अब तो गर्व से कही गई बात को कहने पर भाईजी शरमाने लगते हैं। लोहियावादी तब कहते थे कि बच्चा-बच्चा राम का क्या प्रोग्राम है शाम का। अब कहते हैं बच्चा-बच्चा राम का राघव जी के काम का। वही राघव जी जो मध्यप्रदेश के शिवराजयुग में नौ वर्षों तक वित्त मंत्री रहे। पुरानी बातं छोड़िये वाराणसी में अब अम्बानी बंधु का जलवा है।
वाराणसी के घाट, गली, पार्क व सड़क की सफाई का भी मीडिया ने जगधारीकरण कर दिया। ढिंढोरापिटने में क्या जाता है, बजाते रहो। हाथ में डंडा झाड़ू लिये कई बालाओं की फोटो अखबारों में छपी है। स़ड़क पर साफ-सफाई के प्रति बढ़ती लोकप्रियता स्वागत योग्य है। अनुलोम-विलोम गुरु से पूछिये शायद उन्हें सही जानकारी हो कालाधान के बारे में।
मोदी जी एक गांव को गोद लेंगे, लेकिन अंबानी वाराणसी के सभी घाटों को गोद लेंगे, ऐसी मीडिया में खबर है। पहले मोदी जी ककरहिया गांव को गोद लेने वाले थे, अब चर्चा है कि जयापुर गांव को गोद लेंगे, वैसे वाराणसी के डीएम का कहना है कि अभी यह तय नहीं हुआ है कि किस गांव को गोद लेंगे प्रधानमंत्री जी।
है न सोचने की बात। डीएम को पता नहीं मीडिया के लोग हवा फैलाने में लगे हैं। पहले मीडिया के लोगों ने हवा फैलायी थी कि वाराणसी में मिनी पीएमओ हाउस बनेगा, लेकिन उनकी भविष्यवाणी गलत साबित हुई। अब किस गांव को गोद लेंगे इस पर कयास लगाये जा रहे हैं। मीडिया के लोगों का यह जगधारीकरण है।
वैसे प्रत्येक सांसद एक-एक गांव को गोद लेंगे तो फिर प्रधानमंत्री को चार गांवों को गोद लेना चाहिये। मीडिया ही नहीं, अब तो अपने लोकप्रिय प्रधानमंत्री जी भी कह रहे हैं कि मुझे नहीं पता कालाधान कितना विदेशों में जमा है। मन की बात में अपने दूसरे वायुमार्गी संदेश में मोदी जी ने बड़ी साफगोई से कहा कि मुझे ही नहीं, किसी को भी पता नहीं है कि कालाधन विदेशों में कितना जमा है। मेरी सरकार को भी पता नहीं है और पिछली सरकार को भी पता नहीं था। यह हुई न पते की बात। किसी को नहीं पता कि विदेशों में कितना कालाधन है। सचीमुची अपने प्रधानमंत्री जी बड़ी साफगोई से कोई बात कहते हैं। अच्छा है। इसकी तारीफ करनी चाहिये। तो फिर चुनाव प्रचार के दौरान कहां से आंकड़ा मिला था, जिसके आधार पर कहते थे कि कालाधन आयेगा तो देश के सभी नगरिकों के खाते में 15-15 लाख रुपये जमा हो जायेंगे। हो सकता है तब उन्हें पता नहीं था अब प्रधानमंत्री बनने पर वास्तिवकता की जानकारी हुई तो उसे भी बड़ी साफगोई से कह दिये।
मोदी सरकार के खजांची और रक्षामंत्री अरूण जेटली तो कहते हैं कि कालाधान किसका जमा है उसका नाम नहीं बतायेंगे, वैसे सुप्रीमकोर्ट की फटकार पर उन्हें नामों की सूची देनी पड़ी।
आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविन्द केजरीवाल का कहना है कि प्रधानमंत्री जी अच्छे वक्ता है और सच बोलते हैं। केजरी को भाजपाई भगोड़ा यानी कुर्सीछोड़वा कहते हैं। अब प्रधानमंत्री को कुर्सीछोड़वा के सर्टिफिकेट की क्या जरूरत है।
वाराणसी के घाट, गली, पार्क व सड़क की सफाई का भी मीडिया ने जगधारीकरण कर दिया। ढिंढोरापिटने में क्या जाता है, बजाते रहो। हाथ में डंडा झाड़ू लिये कई बालाओं की फोटो अखबारों में छपी है। स़ड़क पर साफ-सफाई के प्रति बढ़ती लोकप्रियता स्वागत योग्य है।
अनुलोम-विलोम गुरु से पूछिये शायद उन्हें सही जानकारी हो कालाधान के बारे में। लेकिन बाबा को कोई गम्भीरता से ले ही नहीं रहा है। डर है कि कहीं वह शीर्षासन ही न कराने लगें।
# सुरेश प्रताप [लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं । ये उनके निजी विचार हैं]

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