ताकि सनद रहे

एक वसीयत वाया फेसबुक
[ऐसा लोगों के साथ अक्सर होता होगा. मेरे साथ भी हुआ है. फेसबुक पर यह पोस्ट देख कर ऐसा लगा जैसे लाइव हो. पीस बहुत छोटा जरूर है - पर पूरा है. अगर इत्तेफाक नहीं रखते तो जो मन में है कह डालिए. - मॉडरेटर]
अचानक एक कार बेहद रफ्तार से बगल से गुजर गई तो एकबारगी तो यही यकीन नहीं आया कि मैं बच भी गया हूं। लेकिन अल्लाह की मेहरबानी से मेरा बीएमडब्ल्यू कांड होने से बच गया था और मैं साबुत खड़ा था। जब तक उसे देखूं, कार वाला अपनी जरूरी रफ्तार से कहीं का कहीं जा चुका था। उसे पर कोई केस नहीं बनता। न मैं मरा हूं, न घायल हूं। पता नहीं अगली बार ये सौभाग्य किस रूप में आएगा। ऐसे में जरूरी लगा कि एक अनौपचारिक खुली वसीयत कर दूं कि अगर कभी न रहूं तो मेरा आधी जमा-पूंजी मुझे जन्म देनी वाली मां को और बाकी आधी उसे जिसे मैंने जन्म दिया- मेरी बेटी को दे दी जाए।

# मैक [लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं. ये उनके निजी विचार हैं.]

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