बता तेरी जात क्या है?

Cartoon : गणेश
मेरे छूते ही
[जैसे राम ने अहिल्या को छुआ होगा]
तुम सांप्रदायिक से
सीधे, सदा के लिए
सेक्युलर बन जाओगे.

दस्तक

एक दिन, उसने
खैंच डाली
एक तस्वीर ऐसी
[एक लकीर जैसी]
बांट रही है जो
इंसान को,
[इंसानों से ही]
जख्मों को कुरेद कर
खड़ी होती है
एक खौफ की इमारत
[उसके बेसमेंट में]
सब अपनी दुकान चलाते हैं
अपनी अपनी लकीर
पीटनेवाले भी, आपस में
पूछने लगे हैं,
[आजकल!]
बता तेरी जात क्या है?

बैठक

नाई हो?
[बोलो]
या कुशवाहा हो?
[कुछ तो बोलो]
या फिर पाल हो तुम?
[चुप क्यों हो]
एक बार बोल के तो देखो
तुम्हें गले लगाएंगे,
तुम्हारी भी मूर्तियां बनवा देंगे
और देखना
[राजनीति में मजाक नहीं चलता, सीरियसली]
मेरे छूते ही
[जैसे राम ने अहिल्या को छुआ होगा]
तुम सांप्रदायिक से
सीधे, सदा के लिए
सेक्युलर बन जाओगे.

रुख़सत

किसे फेकू कहें?
किसे पप्पू समझें?
सबके सब तो पलटू ही हैं.
कभी सोचा भी न था
ऐसे ऐसे नमूने मिलेंगे
मोहल्ले के
मंगल बाजार में.

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