‘नोटा’ वालों को सलाम! ‘वोटा’ वालों को बधाई!

60 लाख 196 मतदाता हमारे देश के ऐसे मज़बूत इरादों वाले नागरिक हैं, जो कोई भी फ़ैसला मजबूरी नहीं करते।
मुझे छोड़कर देश के उन सभी 60 लाख 196 भाइयों-बहनों को मेरा सलाम, जिन्होंने मजबूरी में किसी ग़लत उम्मीदवार, ग़लत राजनीतिक दल या ग़लत राजनीति का समर्थन करने की बजाय "नोटा" दबाकर इस लोकतंत्र को यह संदेश देने की कोशिश की कि हमें बेहतर उम्मीदवार, बेहतर राजनीतिक दल और बेहतर राजनीति चाहिए।
ये 60 लाख 196 मतदाता हमारे देश के ऐसे मज़बूत इरादों वाले नागरिक हैं, जो कोई भी फ़ैसला मजबूरी नहीं करते। उन्हें इस तरह के नारों में नहीं भरमाया जा सकता कि "A, B या C तो मजबूरी है, लेकिन X, Y या Z ज़रूरी है।" अगर उन्हें लगता है कि A, B या C... X, Y या Z ग़लत हैं, तो वे यह जताने का हौसला रखते हैं कि वे ग़लत हैं। ये 60 लाख 196 मतदाता एक तरफ़ अपने लोकतंत्र का सम्मान भी करते हैं और दूसरी तरफ़ व्यवस्था परिवर्तन और पॉलिसी परिवर्तन का बिगुल भी बजाए रखना चाहते हैं। उनका एक वोट दो चुनावों के लिए था।
इस चुनाव के लिए भी और अगले चुनाव के लिए भी , सभी राजनीतिक दलों को इस संदेश के साथ कि अगली बार कुछ अच्छे उम्मीदवार उतारना, कुछ बेहतर राजनीति करना। "नोटा" के साथ देश में यह पहला चुनाव था, इसलिए जागरूकता कम थी। अगली बार यह जागरूकता बढ़ेगी और आशा करता हूं कि तब तक "नोटा" को और ताकतें भी दी जाएंगी। इसकी सार्थकता तब और बढ़ेगी जब नोटा के मत किसी भी प्रत्याशी को मिले मतों से अधिक हो जाने पर नए उम्मीदवारों के साथ दोबारा चुनाव कराने का इंतजाम हो जाए।
बहरहाल, देश के उन 54 करोड़ 78 लाख 01 हज़ार 604 मतदाताओं को भी मेरा सलाम, जिन्होंने किसी न किसी उम्मीदवार या पार्टी को वोट दिया। वे भी हमारे लोकतंत्र के लिए उतने ही बेशकीमती हैं। वे जहां देश में एक बेहतर सरकार कायम करने में योगदान करते हैं, वहीं "नोटा" वाले मतदाता उसपर और राजनीतिक दलों पर एक लोकतांत्रिक दबाव बनाए रखना का काम करते हैं, ताकि वे लगातार सुधार के रास्ते पर बढ़ सकें।
# अभिरंजन कुमार [लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं । ये उनके निजी विचार हैं] इसलिए सबको बधाई। सबको सलाम।

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