तो क्या प्रियंका गांधी वाराणसी में भी अमेठी और रायबरेली की तरह सक्रिय होने जा रही हैं?

प्रियंका गांधी से अजय राय की मुलाकात दिल्ली के 12, तुगलक लेन में हुई. यह कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का आवास है - और पार्टी की चुनावी मुहिम का सबसे बड़ा सेंटर. अजय राय के मुताबिक प्रियंका गांधी ने उन्हें न सिर्फ हर मदद का भरोसा दिलाया, बल्कि अपना मोबाइल नंबर भी दिया ताकि जरूरत पड़ने पर वो सीधे संपर्क कर सकें. तमाम कोशिशों के बावजूद कांग्रेस में कम ही नेता ऐसे होंगे जिन्हें ऐसी फैसिलिटी मिली हो.

दस्तक

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की अपनी बेटी प्रियंका गांधी को लेकर सोच क्या थी, ये बात हाल ही में कांग्रेस प्रवक्ता जनार्दन द्विवेदी ने मीडिया से शेयर किया था. उसके बाद ऐसी खबरें भी आईँ कि कांग्रेस के कई नेता अक्सर कुछ मामलों में गाउडेंस के लिए राहुल गांधी की जगह, अगर मुमकिन हो तो, प्रियंका गांधी को तरजीह देते हैं. माना भी जाता है कि प्रियंका गांधी कांग्रेस के पूरे चुनाव अभियान से जुड़ी हैं. हालांकि अधिकृत तौर पर अमेठी और रायबरेली तक ही उनके लिमिटेड रोल की बात कही जाती है.
टाइम्स ऑफ इंडिया में बिनय सिंह की रिपोर्ट से तो पता चलता है कि अमेठी और रायबरेली के अलावा प्रियंका गांधी की वाराणसी में भी खासी दिलचस्पी है.
तो क्या प्रियंका गांधी अब बनारस में भी उतनी ही सक्रिय नजर आएंगी जितना अमेठी और रायबरेली में हैं?

अपडेट: बाद में प्रियंका वाड्रा ने साफ कर दिया कि उनकी सक्रियता अमेठी और रायबरेली तक ही सीमित रहेगी. कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय ने भी बाद में कहा कि उन्होेंने प्रियंका को काशी विश्वनाथ के दर्शन के लिए आमंंत्रित किया है और वो जरूर आएंगी.

बैठक

अजय राय ने संकेत दिया है कि चुनाव में वो ‘स्थानीय’ बनाम ‘बाहरी’ को मुद्दा बनाने जा रहे हैं. ऐसे देखा जाए तो बीजेपी के नरेंद्र मोदी, आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल और कौमी एकता दल से मुख्तार अंसारी सभी बाहरी हैं. लेकिन उनकी यह रणनीति शायद ही असरदार साबित हो. नरेंद्र मोदी बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं और उनका कद स्थानीयता जैसे दायरे से काफी ऊपर है - और जहां तक अरविंद केजरीवाल की बात है तो वो इस गेम में सेलीब्रिटी चैलेंजर हैं. वैसे भी बाहरी होने के बावजूद श्रीश चंद्र दीक्षित बीजेपी के टिकट पर वाराणसी से सांसद रह चुके हैं.
कांग्रेस ने अजय राय को वाराणसी लोक सभा सीट से बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के खिलाफ मैदान में उतारा है. अजय राय फिलहाल कांग्रेस के टिकट पर पिंडरा से विधायक हैं और पिछले लोक सभा चुनाव में तीसरे नंबर पर रहे थे. खबरों के मुताबिक पूर्व कांग्रेस सांसद राजेश मिश्रा भी दिल्ली में डेरा डाले हुए थे, लेकिन बाजी अजय राय ने जीत ली.
प्रियंका गांधी से अजय राय की मुलाकात दिल्ली के 12, तुगलक लेन में हुई. यह कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का आवास है - और पार्टी की चुनावी मुहिम का सबसे बड़ा सेंटर. अजय राय के मुताबिक प्रियंका गांधी ने उन्हें न सिर्फ हर मदद का भरोसा दिलाया, बल्कि अपना मोबाइल नंबर भी दिया ताकि जरूरत पड़ने पर वो सीधे संपर्क कर सकें. तमाम कोशिशों के बावजूद कांग्रेस में कम ही नेता ऐसे होंगे जिन्हें ऐसी फैसिलिटी मिली हो.
“प्रियंकाजी ने कहा कि आप जम कर लड़िए. उन्होंने अपना पर्सनल मोबाइल नंबर भी दिया और कहा कि आपको जो भी जरूरत होगी वो आप तुरंत बोलें. वो आपको मुहैया करायी जाएगी.”
- अजय राय, वाराणसी से कांग्रेस के उम्मीदवार
अजय राय के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी उनकी हौसला अफजाई की. माना जाता है कि अजय राय के बीजेपी और समाजवादी पार्टी के कई बड़े नेताओं से अच्छे संबंध हैं, मगर कांग्रेस की ओर से ऐसा बैकेंड सपोर्ट मिलेगा, शायद ही उन्होंने सोचा हो.
“सोनिया जी ने चुनाव में जीतने के लिए शुभकामनाएं दी और कहा कि मैं क्षेत्र में लोगों की सेवा करूं.”
- अजय राय, वाराणसी से कांग्रेस के उम्मीदवार

रुख़सत

अपनी उम्मीदवारी की घोषणा के बाद पत्रकारों से बातचीत में अजय राय ने संकेत दिया है कि चुनाव में वो ‘स्थानीय’ बनाम ‘बाहरी’ को मुद्दा बनाने जा रहे हैं. ऐसे देखा जाए तो बीजेपी के नरेंद्र मोदी, आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल और कौमी एकता दल से मुख्तार अंसारी सभी बाहरी हैं. लेकिन उनकी यह रणनीति शायद ही असरदार साबित हो. नरेंद्र मोदी बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं और उनका कद स्थानीयता जैसे दायरे से काफी ऊपर है - और जहां तक अरविंद केजरीवाल की बात है तो वो इस गेम में एक सेलीब्रिटी चैलेंजर हैं. वैसे भी बाहरी होने के बावजूद श्रीश चंद्र दीक्षित बीजेपी के टिकट पर वाराणसी से सांसद रह चुके हैं.
मोदी के खिलाफ दावा मजबूत करने के लिए अजय राय को मुस्लिम वोटों की दरकार होगी. मुस्लिम वोटों के सबसे बड़े दावेदार मुख्तार अंसारी हैं. कांग्रेस के साथ साथ समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी भी मुस्लिम वोटों की दावेदार हैं – और तीनों की कोशिश है कि मुख्तार अंसारी चुनाव न लड़ें.
नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट यहां पर उल्लेखनीय है.
“अजय राय और अंसारी के बीच पहले से चली आ रही अदावत इस रणनीति को अमलीजामा पहनाने में दिक्कत बन सकती है। स्थानीय नेताओं का कहना है कि अगर राय को कांग्रेस कैंडिडेट नहीं बनाया गया होता तो अंसारी को हटने के लिए मनाना आसान होता।“
बीबीसी डॉट कॉम पर वरिष्ठ पत्रकार अतुल चंद्रा लिखते हैं -
“तकरीबन दो लाख मुस्लिम मतदाताओं में से अधिकांश राय को समर्थन दे सकते हैं. ऐसा तभी संभव होगा जब मुख्तार अंसारी चुनाव न लड़ें. साल 1991 में अजय राय के बड़े भाई अवधेश राय की हत्या कर दी गई थी. अवधेश राय की हत्या के मामले में मुख्तार अंसारी अभियुक्त हैं. अजय राय उस हत्या के मुक़दमे में गवाह हैं. इस पुरानी रंजिश के चलते अंसारी के चुनाव लड़ने से इनकार नहीं किया जा सकता है.”"
इस सियासी मैच का भी असली मजा आखिरी ओवरों में ही आएगा यानि नामांकन वापसी के आखिरी दिन. तभी ठीक से पता चलेगा – वाकई कौन मैदान में हैं – और कौन कितने पानी में?

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1 comment:

  1. बहुत कठिन है डगर पनघट की। वाराणसी एक ऐसी नगरी है जिसकी थाह पाना सबके बस का रोग नहीं।

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