हे गंगा मइया...

क्या सब कुछ मैनेज करना मुमकिन है? शायद हां, और शायद नहीं भी. बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी जब नामांकन करने बनारस पहुंचे तो उनके लिए पहले से ही चौतरफा समर्थन का बाकायदा इंतजाम किया गया था.

दस्तक

चौतरफा यानी चारों तरफ से अलग अलग तरीके का समर्थन. मोदी के प्रस्तावकों में एक तरफ बनारस में गायकी के नामचीन हस्ताक्षर छन्नूलाल मिश्र थे तो दूसरी तरफ बुनकरों का प्रतिनिधित्व कर रहे अशोक कुमार थे. तीसरी छोर को जस्टिस गिरिधर मालवीय संभाले हुए थे, जो बीएचयू के संस्थापक पं. मदन मोहन मालवीय के परिवार से हैं. इस मौके के लिए वह पहले ही सपत्नीक पहुंच चुके थे. समर्थन के चौथे सिरे पर वीरभद्र प्रसाद निषाद रहे. गंगापुत्र के रूप में विख्यात निषाद लोग यानी मल्लाह ही काशी के मूल निवासी माने जाते हैं.

बैठक

लेकिन क्या इस चौतरफे इंतजाम में लोगों का सैलाब भी शामिल था?
शायद नहीं, और शायद हां भी! क्योंकि अगर ये सब पहले से मैनेज किया हुआ था तो दाद देनी होगी ऐसे मैनेजमेंट की, और अगर नहीं तो ये मोदी का जादू रहा – मानना पड़ेगा.
वैसे भी संघ साल भर से ज्यादा वक्त से और उसके बाद बीजेपी कार्यकर्ता जी जान से जुटे हुए हैं. आखिर में अमित शाह ने थोड़ी और जान फूंक दी होगी.  सड़क पर एक और पैर रखने की जगह तो नहीं बची थी. घरों के दरवाजों, बालकनी और छतों पर जहां जितने और जैसे हो सकते थे लोग जमे हुए थे.
ये सब देख कोई भी गदगद हो सकता है, वे तो मोदी ही थे -

“मैं काशी को प्रणाम करता हूं, मेरे मन में विचार... पहले यह विचार आया कि भाजपा ने मुझे यहां भेजा, फिर मैंने सोचा कि मैं काशी जा रहा हूं, पर अब मैं कहता हूं कि न मुझे भेजा गया और न ही मैं यहां आया, बल्कि मां गंगा ने मुझे यहां बुलाया. परमात्मा मुझे शक्ति दे कि मैं यहां के लोगों की सेवा करूं. मैं मां की गोद में वाराणसी में वापस आया हूं.”
- नरेंद्र मोदी, बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार

“माँ गंगा किसी को बुलाती नहीं है, लोग खुद आते हैं स्नान करते हैं और अपने पापों का प्रायश्चित करते हैं. अब मोदी जी क्यों आए ये तो पता नहीं लेकिन ये एक राजनीतिक स्टंट है उनका जिससे उन्हें और उनकी पार्टी को कोई लाभ नहीं मिलने वाला".
- अजय राय, कांग्रेस उम्मीदवार, वाराणसी संसदीय क्षेत्र

कांग्रेस उम्मीदवार की तरह ही कपिल सिब्बल ने भी मोदी के बयान पर अंग्रेजी में कटाक्ष किया है.

रुख़सत

एक बात और...
मोदी के बनारस पहुंचने के बाद मीडिया के कैमरे ही नहीं उनके आसपास मौजूद सुरक्षाकर्मियों में शायद ही कोई ऐसा हो जो उन्हें अपने मोबाइल कैमरे में कैद न किया हो.
तो क्या ये सब भी मैनेज किया हुआ था.
शायद नहीं. अब इतना भी नहीं.

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