‘आप’, ‘मैं’ या फिर से ‘हम’?

Photo Credit: AAP

दस्तक

मैं बोले तो ‘अहं’,
‘अहं’ बोले तो अहंकार
अहंकार बोले तो तानाशाह.
तानाशाह बोले तो हिटलर, बोले- [तो]
मेरे साथ झूमो, नाचो, गाओ - ‘मैं’ हूं डॉन.
कौन है बे?
‘हम’ ‘आप’ के दिल में रहते हैं
हम बोले तो, बोले तो
आर.एस.वी.पी.
और
आप?
“नोटा दबाओ.”

बैठक

मैं हूं रखवाला
हम आपके हैं कौन?
आपको पहले भी कहीं देखा है.

मैं हूं ना
हम साथ साथ हैं
हमारा दिल आपके पास है.

मैं तेरा आशिक
हम तुम्हारे हैं सनम
आपके दीवाने.

जिंदा हूं मैं
हम आपके दिल में रहते हैं
आपकी खातिर.

मैं प्रेम की दीवानी हूं
हम दिल दे चुके सनम
आपकी कसम.

मैं तेरा हीरो
हम हैं राही प्यार के
आशिक बनाया आपने.

मैं आजाद हूं
हम हिंदुस्तानी
कोई आप सा.

एक मैं और एक तू
हम पंछी एक डाल के
पहले आप.

मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी
हम से बढ़ कर कौन
आप मुझे अच्छे लगने लगे.

मैं इंसाफ करूंगा
हम से है जमाना
आपका सुरूर.

क्योंकि मैं झूठ नहीं बोलता
दुल्हन हम ले जाएंगे
आप आए बहार आई.

मैं तेरा दुश्मन
हम से न टकराना
आपकी परछाइयां.

मैं ऐसा ही हूं
हम नहीं सुधरेंगे
आप तो ऐसे न थे.

रुख़सत

आ देखें जरा
किसमें कितना है दम?
‘आप’, ‘मैं’ या फिर से ‘हम’.

No comments:

Post a Comment

आपके विचार बहुमूल्य हैं. अपनी बात जरूर रखें: