केजरीवाल से एक मुलाकात जो हो न सकी - II

आज एक स्क्रिप्ट पेश है - ये पीपली लाइव जैसी स्क्रिप्ट नहीं है, और न ही उससे Inspired है. पीपली लाइव बड़े पर्दे के हिसाब से बनी थी – और ये छोटे पर्दे – यानी Former Idiot Box के हिसाब से. ये स्क्रिप्ट एक नेशनल न्यूज़ चैनल के लिए लिखी गयी थी. दुर्भाग्यवश शो ऑन एयर न हो सका.

दस्तक

बचपन में एक बार पड़ोसी के घर एक महात्मा जी प्रवचन कर रहे थे.
‘जा मा सा माया… ’
फिर उन्होंने समझाया – ‘ …जो नहीं है वही माया है.’
काशायवस्त्रधारी महात्मा जी, मौजूदा कांग्रेस नेता सतपाल महाराज के चेले थे, ऐसा वहां लोग बोल रहे थे.
तब मुझे कुछ भी समझ में नहीं आया. आज भी लगता है बहुत कुछ बदला नहीं है. शायद समझ भी – और समझने की चीजें भी.

बैठक

DISCLAIMER:This is a pure work of fiction. All the names, characters, businesses, places, events and incidents are either the products of the author’s imagination or used in a fictitious manner. Any resemblance to actual persons, living or dead, or actual events is purely coincidental. Hereby, it is said that there is no intention of mocking anybody's prestige or hurt at heart anyone, anyways.
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इसका पहला हिस्सा पढ़ें - Fake TALK: केजरीवाल से एक मुलाकात जो हो न सकी [Part - I]

[कुमार नारद राहत महसूस करते हैं – क्योंकि केजरीवाल सोफे पर बैठे हैं – फर्श पर नहीं]

कुमार नारद - शुक्रिया केजरीवाल जी. मुझे तो डर था आप फिर नीचे न बैठ जाएं.
[Facing camera – Single shot]
Narad Hangout में मेरे गेस्ट हैं अरविंद केजरीवाल. जो मुख्यमंत्री के तौर पर ही नहीं बल्कि इस इंटरव्यू के दौरान भी धरना दे चुके हैं.

कुमार नारद – केजरीवाल जी लगता है धरना देना आपकी Habit बन गई है – या फिर आपकी Hobby है?
अरविंद केजरीवाल – नहीं सर – ये God’s Gift है. बचपन से ही ये मेरा ब्रह्मास्त्र है. जब मैं छोटा था और मेरी कोई डिमांड पूरी नहीं होती थी तब मैं जमीन पर लोटना शुरू कर देता था – मैं हाथ पैर तब तक पटकता जब तक लोग थक हार कर लोग मेरी बात नहीं मान लेते.

कुमार नारद
– यानी पूत के पांव पालने में ही उछलने लगे थे - और बड़े होकर और मजबूत बन गए.
अरविंद केजरीवाल – नहीं सर – थोड़ा सा गैप रहा – जब तक सरकारी नौकरी में रहा - यही तो दिक्कत है सर. हॉस्टल में भी मैं धरना देकर अपनी बात मनवा लेता था.

कुमार नारद – और कविताओं का शौक कब हुआ? क्या ये भी बचपन से है?
अरविंद केजरीवाल – ये हुनर तो मैंने कुमार विश्वास से सीखा सर. मैं हर किसी से कुछ न कुछ सीखता रहता हूं सर - वरना मेरी कोई औकात नहीं है.

कुमार नारद – कुमार विश्वास से आपने क्या सीखा?
अरविंद केजरीवाल - वो अपनी तो एक ही कविता सुनाता है बाकी दूसरों की पेल [Beep] देता है – एक लाइन गाएगा [May sing] कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है – फिर फैज़ या फिराक़ साहब का एक शेर पढ़ देगा - और बोलेगा – उस महान शायर के नाम पर दाद तो दे दो. दूसरों की कविताएं सुनाकर भी ताली खुद के खाते में बटोर लेता है.

कुमार नारद – कुमार विश्वास में सबसे बड़ा Potential आपको क्या नजर आता है?
अरविंद केजरीवाल – सबसे बड़ी बात – वो राजनीति को गहराई से समझता है. वो जानता है – आम आदमी कविता सुनानेवाले को पसंद करता है – किसने लिखा? आम आदमी को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता.
[थोड़ा रुक कर]
ये बात तो माननी पड़ेगी – कविता के फील्ड का वो भी केजरीवाल ही है. वैसे मैं तो छोटा आदमी हूं सर. मेरी कोई औकात नहीं.

कुमार नारद – नेताजी...
[पार्टी join करने के proposal के बाद way of address बदल जाता है.]
अब हमारे दर्शकों को थोड़ा अपनी पार्टी की Functioning के बारे में बताइए. मसलन कौन क्या और कैसे काम करता है.
अरविंद केजरीवाल – देखिए नारद जी. [To be posed - केजरीवाल का भी संबोधन ‘सर’ से ‘नाम’ पर शिफ्ट हो जाता है.]
हर लड़ाई में कम से कम तीन जनरलों की जरूरत होती है. मनीष सिसोदिया, योगेंद्र यादव जी और प्रशांत भूषण जी – ये तीनों हमारे जनरल हैं.

कुमार नारद – अच्छा.
अरविंद केजरीवाल - अब इनके काम यूं समझ लीजिए कि प्रशांत भूषण जी हमारे Speech Writer हैं जी.

कुमार नारद – ओके.
अरविंद केजरीवाल - उन्हीं के बल पर मैं सभी सांसदों को हत्यारा, बलात्कारी और डकैत कहता रहा. मैं आश्वस्त था, कोई भी बात होगी तो मुकदमे की पैरवी के लिए वो खुद पहुंच जाएंगे. ऐसे मामलों में वो टोकन फीस के तौर पर एक रुपये लेते हैं – पर मेरे लिए वह भी फ्री है.

कुमार नारद – आपके यहां Politics के Expert योगेंद्र यादव हैं – पर आप के राजनीतिक कामकाज संजय सिंह संभालते हैं.
अरविंद केजरीवाल – संजय पर आते हैं, पहले योगेंद्र जी के बारे में जान लीजिए - योगेंद्र जी हमारे Style Director हैं – हर मामले में - वो आम आदमी की नब्ज पहचानते हैं.

कुमार नारद – फिर तो उन्होंने आपको मफलर पहना दिया – जैसे आपने सबको टोपी पहनाई.
अरविंद केजरीवाल – कह सकते हैं. आप कह सकते हैं सर. मैं Deny नहीं करूंगा.

कुमार नारद – ठीक है.
अरविंद केजरीवाल – मफलर कब सर पर बांधना है? क्या बोलते वक्त मफलर गले में रखना है? ये सब योगेंद्र जी ही तय करते हैं सर.

कुमार नारद – Great!
अरविंद केजरीवाल – जब मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे का एलान कर रहा था तो उन्हीं की सलाह पर मैंने मफलर पूरी तरह लपेट लिया था. आपने देखा होगा लोग कैसे इसके लपेटे में आ गये.

कुमार नारद – मनीष तो लंबे अरसे से आपके साथ हैं. शायद लोकपाल आंदोलन से भी पहले से?
अरविंद केजरीवाल - मनीष शुरू से ही मेरा इवेंट मैनेजर रहा है. कब प्रेस कांफ्रेंस करनी है? उसमें कब क्या बोलना है? कब धरने पर बैठ जाना है – और कब उठना है. ये सब मनीष ही तय करता है – और संजय सिंह उसे Execute करते हैं. संजय हमारे Event Coordinator हैं.

कुमार नारद – और बाकी लोग.
अरविंद केजरीवाल - फिलहाल आशुतोष जी और शाजिया जी Field Trial में हैं – उन्हें अभी खुद को Prove करना है. वैसे दोनों होनहार हैं और काम भी अच्छा कर रहे हैं.

कुमार नारद – एक और सवाल है. बड़ा सवाल.
अरविंद केजरीवाल – सौ पूछो सर. मैं तो बहुत छोटा आदमी हूं.

कुमार नारद – आप कहते हैं – मेरी कोई औकात नहीं है. फिर आपने अन्ना को क्यों छोड़ दिया? अन्ना आपके साथ होते तो आपका Weight ज्यादा होता.
अरविंद केजरीवाल – मैंने पल्ला नहीं झाड़ा. मेरी कोई औकात नहीं है सर - लेकिन अब अन्ना की भी कोई औकात नहीं रही – वैसे भी मैंने उनमें छोड़ा क्या था – कुछ नहीं बचा था उनमें सर. मुंबई का धरना याद है न आपको.
[थोड़ा रुक कर]
फिर भी अन्ना जी मेरे गुरु हैं – [Stressing] अब उनका साथ नहीं सर - बस आशीर्वाद चाहिए.

कुमार नारद – फिर तो ठीक ही कहते हैं लोग - काम होते ही आप हर किसी को किनारे लगा देते हैं.
अरविंद केजरीवाल – अरे नहीं सर. असल में - स्वामी अग्निवेश आउट ऑफ कंट्रोल जा रहे थे इसलिए मुझे वो स्टेप लेना पड़ा. वैसे कुमार भी इधर काफी उछलने लगा था. तभी तो मैंने उसे सूली पर ही चढ़ा दिया – जा बेटा – लड़ जा शहजादे से – खुद ही अक्ल ठिकाने आ जाएगी.

कुमार नारद – यही चाल तो आपने शाजिया के साथ चली थी, क्यों?
अरविंद केजरीवाल – मगर वो कवि नहीं पत्रकार रह चुकी हैं.

कुमार नारद – यानी आप सबको एक टूल की तरह इस्तेमाल करते हैं – Use and फिर Throw Away.
अरविंद केजरीवाल – नहीं सर ऐसा बिलकुल नहीं है सर. वैसे मैं कब चाहूंगा कि पार्टी में मेरे से ज्यादा किसी और की औकात हो पाए - मेरी तो दुकान ही बंद हो जाएगी सर.

कुमार नारद – दुकान कहां बंद होने वाली है आपकी. अब तो आपने डिनर के भी पैसे लेने शुरू कर दिये हैं.
अरविंद केजरीवाल – आप ये सवाल मोदी जी से क्यों नहीं पूछते.

कुमार नारद – अब इसमें मोदी जी कहां से आ गए? वो तो डिनर के पैसे नहीं लेते.
अरविंद केजरीवाल – भाषण के तो लेते हैं.
[कुमार नारद आश्चर्य से देखते हैं]
Free Speech भी ये लोग खत्म कर देंगे. अरे भाषण तो मुफ्त में दो – उसके लिए भी फीस रख दी - ये लोग देश को बेच देंगे.

कुमार नारद – अब इसमें देश को बेचने जैसी क्या बात है?
अरविंद केजरीवाल – भई वाह! मोदी चाय पिलाएं - रैली के पैसे लें तो ठीक – केजरीवाल डिनर करें तो बवाल काटो. मोदी से कोई ये सवाल क्यों नहीं पूछता?
[Angry]
कितने में बेचा मीडिया को? मैं जानता हूं. मेरे पास सारी Information है.
[केजरीवाल अचानक उठकर खड़े हो जाते हैं – भाषण देने वाले अंदाज में बोलते हैं]
क्यों बड़ी बड़ी हेडलाइन चलती है? केजरीवाल ने मीडिया को को धमकाया. अरे हम क्या धमकाएंगे. तुम तो खुद हमे धमकाते रहते हो. केजरीवाल को Z Plus Security दी जाएगी – ये दिया गया – वो दिया जाएगा - अरे भाड़ में गई तेरी Security. हम न वाड्रा से डरते हैं – न अंबानी से डरते हैं – न मोदी से और न ही मीडिया से.

कुमार नारद – बैठ जाइए केजरीवाल जी आप स्टूडियो में हैं - जंतर मंतर पर नहीं हैं.
अरविंद केजरीवाल – कोई बात नहीं यार – लोग टीवी तो देख रहे हैं ना. [केजरीवाल अब फर्श पर बैठ जाते हैं]

कुमार नारद – अच्छा बताइए - आगे क्या प्लान हैं?
अरविंद केजरीवाल – आगे...
[थोड़ा सोचकर]
अब इंटरव्यू के लिए भी पचास हजार लगेंगे -  फ्री का ये आखिरी इंटरव्यू है.
[Taunting smile]
बहुत पैसा है मीडिया के पास. सरकार बनी तो जरूर जांच कराउंगा.

कुमार नारद – सुना है आप की अगली मंजिल White House है?
अरविंद केजरीवाल – जी सर. ये हकीकत है - ये Fact है सर. सोशल मीडिया पर इसे हमारी टीम ने तो नहीं डाला है - लेकिन ये Fact है सर.

कुमार नारद – तो आप अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव लड़ना चाहते हैं?
अरविंद केजरीवाल – लड़ेंगे सर... बिलकुल लड़ेंगे. दस साल RTI के लिए लड़ा – अब इसके लिए लड़ेंगे.

कुमार नारद – इरादा पक्का है?
अरविंद केजरीवाल – देखिए… मैं बहुत छोटा आदमी हूं सर. मेरी कोई औकात नहीं है. पर अमेरिका में मेरी Fan following भी अच्छी खासी है.

कुमार नारद – वो तो ठीक है… पर उसके लिए कुछ Eligibility Criteria है. Arnold Schwarzenegger के fans तो दुनिया भर में हैं – मगर वो California के Governor से आगे नहीं बढ़ सके. ऐसे में आप कहां टिकते हैं?
अरविंद केजरीवाल – [Chants his pet song] हम होंगे कामयाब... होंगे कामयाब... एक दिन... [कुमार नारद को भी गाने का इशारा करते हैं] ओओ... हो हो मन में है विश्वास... पूरा है विश्वास.

कुमार नारद – आप इंटरव्यू में भी भाषण देने लगते हैं – धरने पर बैठ जाते हैं - अमेरिका में तो ये नहीं चलेगा. फिर वहां कैसे कामयाब होंगे?
अरविंद केजरीवाल – कामयाब तो होंगे ही सर. और तब तो - मैं दुनिया भर में जांच करा सकूंगा.

कुमार नारद – पर वहां हिंदी नहीं चलती...
अरविंद केजरीवाल – [Sings English version] – ‘We’ll overcome a day… we’ll overcome…
देखिए सर एक चीज योगेंद्र यादव जी से भी मैंने सीखी है.

कुमार नारद – वो क्या?
अरविंद केजरीवाल – वो कहते हैं ना – अभी हम लोग नये हैं – सीख रहे हैं.

कुमार नारद – तो फिर अब अमेरिका में आंदोलन की तैयारी है?
अरविंद केजरीवाल – Think Big सर. आदमी छोटा हूं – पर सोचता बड़ा हूं.

कुमार नारद [थोड़े झुंझलाते हुए] – अरे भई...
अरविंद केजरीवाल – [बात काटते हुए] सरजी... वहां आंदोलन नहीं, Lobbying चलती है –सारा फंड उसी के लिए तो जुटा रहा हूं. लोकपाल से Media Attention मिला – चुनाव लड़ने से Branding और अब कायदे से Funding हो जाए फिर Lobbying करेंगे. मैं बहुत छोटा आदमी हूं. मेरी कोई औकात नहीं है.

कुमार नारद – तो आप प्रधानमंत्री पद की होड़ में नहीं हैं.
अरविंद केजरीवाल – देखिए सर मैं बहुत छोटा आदमी हूं. मेरी कोई औकात नहीं है.

कुमार नारद – यानी मोदी जी को न तो कांग्रेस से चुनौती है - न ‘आप’ से.
अरविंद केजरीवाल – आप समझे नहीं सर - कांग्रेस से चुनौती तो है ही.

कुमार नारद – कांग्रेस ने तो अपना PM Candidate घोषित तो किया नहीं है. सुना है  राहुल गांधी भी 2019 की तैयारी करा रहे हैं.
अरविंद केजरीवाल – आप लोग खबर वही बनाते है जो लाइन नेता दे देते हैं. दरअसल, इस देश में राजनीति कम ही लोग समझ पाते हैं.
अब सुनिए - कांग्रेस के प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार ‘मैं हूं.’

कुमार नारद – ‘आप?’ बेगानी शादी में आप कहां से टपक पड़े केजरीवाल जी?
अरविंद केजरीवाल – देखिए सर. राहुल जी Born Claimant हैं - कभी भी... किसी भी दिन PMO में वैसे ही दाखिल हो सकते हैं जैसे वो अजय माकन साहब की प्रेस कांफ्रेंस में घुस गये.

कुमार नारद – आपने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया. मेरा सवाल ये नहीं था.
अरविंद केजरीवाल – मेरी बात तो सुनिए. जब से मैंने शीला दीक्षित जी को हराया है तब से अजय माकन जी लगातार मेरे संपर्क में हैं. मेरी इस Performance से अगर कोई सबसे ज्यादा खुश है तो वो माकन साहब ही हैं. लेकिन इसमें एक लोचा है सर.

कुमार नारद – लोचा... कैसा लोचा केजरीवाल जी...
अरविंद केजरीवाल - देखिए सर. दिल्ली में उन्हें बीजेपी को रोकना था. दिल्ली को लेकर उन्हें कोई शिकायत नहीं है - और अब माकन साहब ने नई दिल्ली के लिए भी Propose किया है - लेकिन उनकी एक शर्त है सर.

कुमार नारद – कैसी शर्त?
अरविंद केजरीवाल – शर्त ये है सर कि मुझे ‘खामोश’ रहना होगा.

कुमार नारद – [ठहाके लगाते हैं] हा हा हा हा हा.
अरविंद केजरीवाल – [केजरीवाल Serious लुक देते हैं] ये Fact है सर. हंसनेवाली बात नहीं है सर. माकन साहब का कहना है - प्रधानमंत्री बन कर भले ही देश भर में धरना देते फिरो – चाहो तो जाकर अमेरिका में भी धरना दो प्रदर्शन करो – मगर शर्त ये है कि मुल्क में खामोश रहो @ any cost.

कुमार नारद – ऐसा क्या?
अरविंद केजरीवाल - असल में मैडम को खामोश PM की लत लग गयी है सर. और मजे की बात ये है सर कि इस Parameter में राहुल जी भी फिट नहीं हो पा रहे. वरना मेरी कोई औकात नहीं है सर.

कुमार नारद – तो ये बात है. आपको ये शर्त मंजूर है?
अरविंद केजरीवाल – एक और कविता सुनिए सर.

कुमार नारद – धूमिल की... या आपने फिर कुछ लिख दिया?
अरविंद केजरीवाल – धूमिल को मारो गोली सर. मैं बहुत छोटा आदमी हूं. मेरी कोई औकात नहीं है. ये कविता मेरी नहीं - बल्कि डॉक्टर साहब की है.

कुमार नारद – डॉक्टर मनमोहन सिंह की बात तो नहीं कर रहे हैं आप?
अरविंद केजरीवाल – बिलकुल सही. मैं अब तक आपसे भले ही कुछ नहीं सीख पाया – पर आप धीरे धीरे समझदार होते जा रहे हैं. आ जाइए मेरी पार्टी में सर. मैं आपको भी प्रवक्ता बना दूंगा.
[कुमार नारद कभी केजरीवाल को देखते हैं, कभी टैबलेट को टच करते हैं. छोटे से Pause के बाद केजरीवाल फिर बोलते हैं] –
मुझे कुछ करना थोड़े ही है सर - बस टोपी ही तो पहनानी है.
[केजरीवाल जेब से एक टोपी निकाल कर नारद को थमा भी देते हैं]

कुमार नारद – ये टोपी आप मुझे क्यों दे रहे हैं?
अरविंद केजरीवाल – रक्खो सर. काम आएगी. वैसे भी मैं सिर्फ टोपी ही तो पहनाता हूं. बाकी काम तो अपने आप हो जाते हैं. फिक्र नो करो सर - राज्यसभा का भी Option है. वैसे तो मैंने कइयों से Promise कर रखा है, फिर भी Scope है. मैं पलटी मार लूंगा सर – ‘आप’के लिए.

कुमार नारद – Thank You. [टोपी उलट-पुलट कर देख रहे हैं. Smiling - ऐसे जैसे पार्टी Join करने का Offer उन्हें भाने लगा है]
अरविंद केजरीवाल - डॉक्टर साहब की कविता सुनिए. इस कविता को आज देश का बच्चा बच्चा जानता है.
बच्चा बच्चा से मेरा मतलब आम आदमी है. कविता सुनिये सर -

‘मैं और मेरी खामोशी…
मैं और मेरी खामोशी अक्सर बातें करते हैं
मजबूर ये हालात, इधर भी हैं, उधर भी,
खामोशी की एक रात, इधर भी है, उधर भी;
कहने को बहुत कुछ है - मगर - किस से कहें हम!
कब तक यूं ही खामोश रहें हम - और सहें हम?'

कुमार नारद – वाह...वाह, वाह!
अरविंद केजरीवाल - दस साल बीत गये सर लेकिन ये सिलसिला इससे आगे नहीं बढ़ सका – [धीमे से गुनगुनाते हैं] – ‘खामोश मैं यों बैठा कि जस की तस छोड़ दीनी कुरसिया...’
[फिर थोड़ा समझाते हुए]
वैसे डॉक्टर साहब ने इस कविता के मर्म को बहुत जल्दी समझ लिया – और लगे हाथ दो Term पूरे कर लिये. सब तो सब राहुल जी के लिए भी मुसीबत बढ़ा गये सर. अगर पीएम बने बेटा तो – बस खामोश रहो. उससे पहले जितना मन हो – भसड़ मचा लो... भड़ास निकाल लो.

कुमार नारद – फिर भी... कांग्रेस आपको प्रधानमंत्री क्यों बनाएगी. आपने तो उसकी खटिया खड़ी कर दी है.
अरविंद केजरीवाल - [छोटे से Pause के बाद]
असल में कांग्रेस को मुझमें चौधरी चरण सिंह जी का अक्स नजर आता है – ऊपर से मैं डबल बेनिफिट पैकेज जो हूं.

कुमार नारद – वो क्या?
अरविंद केजरीवाल - मैं खुद ही Support वापस कर दूंगा – उन्हें सोचने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी.

कुमार नारद – और फिर आप का आम आदमी समझेगा - Congress ने ही आपसे Support वापस ले लिया.
अरविंद केजरीवाल – Exactly.

कुमार नारद – आप गुजरात गए थे – लेकिन मोदी से नहीं मिल पाए – भूतपूर्व मुख्यमंत्री तो आप भी हैं?
अरविंद केजरीवाल- कौन कहता है मैं मोदी से नहीं मिला. मैं तो उनकी चाय भी पी आया.

कुमार नारद – अच्छा! वो कैसे?
अरविंद केजरीवाल - एक जगह चाय पर चर्चा चल रही थी – मैं चुप चाप घुस गया – मुझे कोई पहचान भी नहीं पाया – आम आदमी तो लगता ही हूं. वैसे अदरक वाली चाय अच्छी थी – अब तक खांसी नहीं आई.

कुमार नारद – हां, आम आदमी को पहचानना कठिन तो है. वैसे गुजरात का बाकी सफर कैसा रहा, कुछ बताइए?
अरविंद केजरीवाल - देखो...
[तभी उनकी पेटेंट खांसी आ धमकती है और बातचीत रोकनी पड़ती है. कुछ देर में खांसी का जोर थमता है – लेकिन बात - ऑफ द रिकॉर्ड होती है.]

कुमार नारद – [उठकर Ear Piece निकालते हुए] और...
अरविंद केजरीवाल – [नारद के कंधे पर हाथ रखकर] – मिलते हैं, जल्द ही.

कुमार नारद – एक बात बताइए – आप लोगों ने बीजेपी दफ्तर पर हमला क्यों किया?
अरविंद केजरीवाल - एक बात बताऊं – अब तो आप घर के आदमी हो - अगर दिल्ली में बीजेपी दफ्तर पर धावा बोलने और महाराष्ट्र में मेटल डिटेक्टर तोड़ देने से फायदा होता है तो इसमें बुराई क्या है - मुझे कोई क्रांति थोड़े ही करनी है.

कुमार नारद – [Nodding in Affirmative].
अरविंद केजरीवाल – देखो, हंगामे का सबसे बड़ा फायदा है कि मीडिया अटेंशन खुद ब खुद मिलता है. बाकी खबरें सुर्खियों से गायब हो जाती हैं. दूसरी पार्टीवाले भी अपनी बात कहने के बजाए हंगामे पर ही रिएक्शन देते रहते हैं. और इसमें सबसे ज्यादा मॉनेटरी गेन है – मैने देखा है – जब जब ऐसा होता है – चालीस पचास लाख लोग अपने आप Donate कर देते हैं.
[चलने को होते हैं, तभी मुड़ कर]
हां, एक काम करना मोदी वाला पोर्शन तो पूरा लेना मगर कुमार विश्वास वाली बात रिपीट में उड़ा देना.


The END 

इसका पहला हिस्सा पढ़ें - Fake TALK: केजरीवाल से एक मुलाकात जो हो न सकी [Part - I]

रुख़सत

दस्तक में मैंने एक महात्मा जी का जिक्र किया है. वो महात्मा जी - और उनकी बातें अक्सर एक Resonance Hybrid की तरह याद आ जाते हैं. खासकर उनका गुस्सा.
प्रवचन के बाद प्रसाद मिला. हमउम्र बच्चों के साथ मैं भी घर के अंदर चला गया. वहां प्रसाद के अलावा भी हमें खाने की और चीजें मिलीं. बच्चों को और चाहिये भी क्या. इतने में किसी के चिल्लाने की आवाज सनाई दी. हम लोग और घर के कुछ बड़े भी दौड़े दौड़े बाहर आए.
महात्मा जी बेहद गुस्से में थे.
असल में महात्मा जी को जो हलवा परोसा गया था वो उन्हें जरा भी पसंद नहीं आया.
प्लेट में से थोड़ा हलवा मुट्ठी में लेकर निचोड़ते हुए महात्मा जी बोल रहे थे, ‘ये हलवा है. इसमें से कम से कम दो चम्मच घी निकलना चाहिए. इसमें तो एक बूंद भी नहीं निकल रहा.’
बाकियों की तरह महात्मा जी भी शायद याद नहीं रहते, लेकिन हर इंसान अपनी बात या अपने काम की वजह से जाना जाता है.
वाकई.
जा मा सा माया – जो नहीं है वही माया है.

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