केजरीवाल से एक मुलाकात जो हो न सकी - I

आज एक स्क्रिप्ट पेश है - ये पीपली लाइव जैसी स्क्रिप्ट नहीं है, और न ही उससे Inspired है. पीपली लाइव बड़े पर्दे के हिसाब से बनी थी – और ये छोटे पर्दे – यानी Former Idiot Box के हिसाब से. ये स्क्रिप्ट एक नेशनल न्यूज़ चैनल के लिए लिखी गयी थी. दुर्भाग्यवश शो ऑन एयर न हो सका.

दस्तक

बचपन में एक बार पड़ोसी के घर एक महात्मा जी प्रवचन कर रहे थे.
‘जा मा सा माया… ’
फिर उन्होंने समझाया – ‘ …जो नहीं है वही माया है.’
काशायवस्त्रधारी महात्मा जी, मौजूदा कांग्रेस नेता सतपाल महाराज के चेले थे, ऐसा वहां लोग बोल रहे थे.
तब मुझे कुछ भी समझ में नहीं आया. आज भी लगता है बहुत कुछ बदला नहीं है. शायद समझ भी – और समझने की चीजें भी.

बैठक

DISCLAIMER:This is a pure work of fiction. All the names, characters, businesses, places, events and incidents are either the products of the author’s imagination or used in a fictitious manner. Any resemblance to actual persons, living or dead, or actual events is purely coincidental. Hereby, it is said that there is no intention of mocking anybody's prestige or hurt at heart anyone, anyways.

इसका दूसरा हिस्सा पढ़ें - Fake TALK: केजरीवाल से एक मुलाकात जो हो न सकी [Part - II]

Host - Kumar Narad [नारद मुनि के Updated Ultra-Advanced Version – जो इंटरव्यू लेने और देने के लिए - किसी से, कहीं भी, कभी भी - हरदम तैयार रहते हैं. ये उनकी USP है और Market में Brand Value भी.]
Guest - Arvind Kejriwal.

[Scene- एक दरवाजा है. दरवाजा बंद है. उसके ऊपर लाल रंग की एक बत्ती जल रही है. दरवाजे के ऊपर लिखा है – On Air.
होस्ट कुमार नारद टी शर्ट, जींस और महंगे फ्रेमवाला चश्मा पहने हुए हैं. पीठ पर बैकपैक में एक Spanish गिटार भी है. एक हाथ में टैबलेट है - और दूसरा हाथ अपनी मोटी चोटी पर फेरते हुए दाखिल होते हैं [बाल तो बचे नहीं, चोटी अब भी मोटी है].
अरविंद केजरीवाल [Aston – अरविंद केजरीवाल, अपने’आप’ नेता] स्टूडियो में पहले से ही मौजूद हैं – बार बार रिस्ट-वॉच और स्टूडियो की घड़ी देखते हैं, कभी सोफे पर बैठते हैं. कभी उठ खड़े होते हैं – और कभी धरनावाले अंदाज में फर्श पर बैठ भी जाते हैं. अगल बगल देखते हैं – मगर कोई आम आदमी नजर नहीं आ रहा. अब तक एक बार भी खांसी नहीं आई है. गले में मफलर भी नहीं है. शायद गुजरात दौरे की गर्मी का असर है.]
कुमार नारद [एंट्री लेते हैं – केजरीवाल फर्श पर बैठे हैं] – माफी... माफी...
[भारी जल्दबाजी में]
माफी जी. Extremely SORRY for late. असल में - आप के इंटरव्यू के लिए ही होमवर्क कर रहा था.
[गेस्ट की बात भी खुद ही बोल देते हैं].
खैर कोई बात नहीं. अच्छा... अच्छा नमस्कार. नमस्कार.
अरविंद केजरीवाल – कोई बात नहीं सर. नमस्ते, मैं बहुत छोटा आदमी हूं सर. मेरी कोई औकात नहीं है.

कुमार नारद – इसीलिए आप फर्श पर बैठे हैं?
अरविंद केजरीवाल – नहीं सर. आपने देर की तो मैं धरने पर बैठ गया. लीजिए अब सोफे पर बैठ जाते हैं.
[Kejriwal jumps to sofa]
अब मैं कह सकता हूं - ये आम आदमी की जीत है.

कुमार नारद – शुक्रिया.
[Host also takes seat]
पूछिये... पूछिये क्या पूछना है...
अरविंद केजरीवाल – मैंने क्या पूछना सर? इंटरव्यू तो आपने लेना है.

कुमार नारद – अच्छा, तो ये बात है –
[थोड़ा सोचकर - चश्मा चढ़ाते हुए]
इंटरव्यू मुझे लेना है. कोई बात नहीं जी. मैं तो इंटरव्यू देने की तैयारी कर रहा था – अब ले लेते हैं – क्या फर्क पड़ता है?
[Looking on Tablet, then on Kejriwal]
वैसे. .. सवाल तो, सबसे आप ही पूछते हैं.
अरविंद केजरीवाल – अरे नहीं सर, मैं तो नेताओं से सवाल पूछता हूं – आप तो अभी पत्रकार हैं.

कुमार नारद – अभी पत्रकार हूं... मतलब?
अरविंद केजरीवाल – मतलब... बाद में नेता बन सकते हैं. मैं हूं ना सर.

कुमार नारद – [कुछ सोचते हैं] अच्छा चलिए...
[सवालों का सिलसिला शुरू होता है]
चलिए ‘आप’ की बात करते हैं. आप से मेरा मतलब आम आदमी पार्टी से है.
अरविंद केजरीवाल – आप बिलकुल ठीक कह रहे हैं. आप का मतलब - मैं ही हूं – जब भी मैं कहता हूं - यह आम आदमी की जीत है, उसका मतलब मेरी ही जीत होती है. आम आदमी की सरकार का ये कतई मतलब नहीं कि किसी और की सरकार – बल्कि मेरी सरकार – सिर्फ मेरी सरकार.

कुमार नारद – आपने एक किताब भी लिखी है – स्वराज - और शायद उसे आप का विजन स्टेटमेंट माना जाता है.
अरविंद केजरीवाल – वही तो मैं बता रहा था आपको. स्वराज का मतलब अपना राज. अपना राज – यानी - मेरा राज. जब मैं आम आदमी के राज की बात करता हूं तो उसका मतलब भी - मेरा ही राज है.

कुमार नारद – फिर तो आपके नाराज साथी सही कहते हैं - आप पार्टी को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह चलाते हैं.
अरविंद केजरीवाल – पार्टी को गोली मारो सर. मैं बहुत छोटा आदमी हूं, मेरी कोई औकात नहीं है. मैं तो देश को भी पार्टी की तरह चलाना चाहता हूं. [Convey with tone – like private limited company.]

कुमार नारद – मतलब देश को भी आप प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह चलाना चाहते हैं.
अरविंद केजरीवाल – बिलकुल नहीं सर. मैं तो देश को बचाने की लड़ाई लड़ रहा हूं. अगर देश मेरे तरीके से नहीं चला तो देश बचेगा नहीं सर. देश को - ये लोग बेच देंगे सर.

कुमार नारद – आपके कहने का मतलब तो यही है - आप देश को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह चलाना चाहते हैं.
अरविंद केजरीवाल – बिलकुल नहीं सर. जो मैं कह रहा हूं - वो मैं नहीं कह रहा.
मेरा मतलब वो नहीं - जो आप समझ रहे हैं - वो मैं नहीं कह रहा हूं – बल्कि जो मैं कह रहा हूं – वो आप नहीं समझ पर रहे – जो मैं समझ रहा हूं – वो मैं नहीं कह रहा.

कुमार नारद – यानी - जो आप कह रहे हैं – वो आप नहीं कह रहे हैं.
अरविंद केजरीवाल – Exactly.

कुमार नारद – जो भी आप कहते हैं – वो Abstract में होता है.
अरविंद केजरीवाल – अरे वाह, आप तो समझदार हैं. मैं तो आपको भी आम आदमी ही समझ रहा था.

कुमार नारद – मतलब आम आदमी को आप बेवकूफ समझते हैं.
अरविंद केजरीवाल – नहीं सर.

कुमार नारद – फिर?
अरविंद केजरीवाल – Intellectual.

कुमार नारद – Intellectual! [आश्चर्य के साथ]
अरविंद केजरीवाल – Intellectual यानी आम आदमी. Intellectual हमेशा Abstract में होता है, और आम आदमी हमेशा Abstract में जीता है.

कुमार नारद – मतलब आप दोनों को बराबर समझते हैं.
अरविंद केजरीवाल – बराबर... बराबर.

कुमार नारद – तो आप Intellectual को भी बेवकूफ समझते हैं?
अरविंद केजरीवाल – नहीं सर. अपनी बात समझाने के लिए मैं आपको एक कविता सुनाता हूं.
ध्यान से सुनिये. अभी आप सब समझ जाएंगे. कविता सुनिए सर -

‘सरजी! सच कहूं – मेरी निगाह में
न कोई छोटा है
न कोई बड़ा है
मेरे लिए, आम आदमी एक जोड़ी जूता है
जो मेरे सामने मरम्मत के लिए खड़ा है.’

कुमार नारद – ये तो आपने धूमिल की कविता बांच दी.
अरविंद केजरीवाल – कौन धूमिल सर. ये कविता तो मैंने लिखी है. अभी अभी... आप से बात करते करते. कौन धूमिल? आप देश के एक करोड़ लोगों से पूछ कर दिखा दीजिए - धूमिल की कविता किसी ने पढ़ी है. कम से कम हमारे वोटर तो नहीं पढ़े हैं. वैसे भी कुछ ऐसा वैसा होने की गुंजाइश नहीं है – धूमिल कोई ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की तरह मीडिया में स्टेटमेंट देने थोड़े ही आ रहे हैं. अब तो माफी भी नहीं मांगनी पड़ेगी.

कुमार नारद – और Intellectuals?
अरविंद केजरीवाल -  वे धूमिल से ऊपर उठ चुके हैं. Abstract में सब चलता है सर.

कुमार नारद – Great! आपका आइडिया तो बिलकुल Unique है.
अरविंद केजरीवाल – ये Social Engineering है सर.
Abstract थीम पर पहले मैंने Voters की भीड़ जुटाई - और एक ही आवाज में उन्हें Common Platform पर ला दिया.
सर - हमारे ज्यादातर वोटर वे ही हैं जिन्हें या तो धूमिल के बारे में कुछ भी नहीं पता – या उससे उन्हें फर्क नहीं पड़ता.

कुमार नारद - आपने कहा था कि दिल्ली में लोकपाल लाएंगे, मगर 49 दिन में ही भाग खड़े हुए.
अरविंद केजरीवाल – ये सिर्फ मीडियावाले कहते हैं.
[With stress – like he ruled for 20 years.]
आम आदमी जानता है – दिल्ली में लगातार 49 दिन तक आप की सरकार रही. और अगली बार भारी बहुमत के साथ सरकार बनाएंगे – और उससे भी ज्यादा दिन तक शासन चलाकर दिखा देंगे.

कुमार नारद – आपने कहा था कि आपकी सरकार बनी तो Corruption खत्म कर देंगे.
अरविंद केजरीवाल – कर दिया न सर. अब तो असली मुद्दा मोदी हैं – मीडिया है. अब कौन करप्शन की बात करता है सर. मैं भी तो – अब - कभी कभार ही करप्शन की बात करता हूं.

कुमार नारद – आप मीडिया से अचानक इतने नाराज क्यों हो गए हैं?
अरविंद केजरीवाल – क्या बात करते हैं सर. मैं तो खुद Media की Delivery हूं. आप किसी से भी पूछ लीजिए. आम आदमी से लेकर - बीजेपी या कांग्रेस किसी से भी.

कुमार नारद – [टैबलेट पर एक न्यूज़ साइट दिखाते हुए] मगर - अपनी डिनर पार्टी में आपने सरेआम धमकी दी.
अरविंद केजरीवाल - मैंने कुछ नहीं कहा. [with a cunning smile] कुछ भी नहीं कहा. आपसे कैसी नाराजगी हो सकती है सर. मैं बहुत छोटा आदमी हूं सर – मेरी कोई औकात नहीं है सर.

कुमार नारद – और… टीवी पर जो बाइट चल रही थी… वो?
अरविंद केजरीवाल - वे लोग कर सकते हैं सर. ये मीडियावाले बिके हुए हैं सर. इसमें भारी पैसा लगा है. अंबानी का पैसा - अडानी का पैसा. मेरी सरकार आई तो सबकी जांच कराउंगा – सबको जेल भिजवाउंगा सर – मीडियावालों को भी.

कुमार नारद – [थोड़े आश्चर्य से देखते हैं] आप तो फिर से धमका रहे हैं.
अरविंद केजरीवाल – बिलकुल नहीं. ये झूठ बोल रहे हैं.

कुमार नारद – झूठ! कौन... मैं?
अरविंद केजरीवाल – माफी चाहूंगा, मैं आपकी बात नहीं कर रहा. कहां आप और कहां वे. एक आप हैं सर और एक वो साले [Beep] हैं. [फिल्म शराबी वाले अंदाज में... Film shots can be inserted in flashback, thinking.]

कुमार नारद - आपकी डिनर पार्टी के बाद एक ट्विटर Trend था –
[Showing Tablet to Guest]

‘#YoKejriwalSoHonest कि उन्होंने अपनी शादी में लोगों से खाने का भी पैसा ले लिया था.’
अरविंद केजरीवाल – ये Fact है सर. करना पड़ता है सर. Charity Begins @ Home सर.

[Some more Twitter trends are scrolling:

Tajinder Pal S Bagga @tajinderbagga
#YoKejriwalSoHonest उन्होंने अपनी साली को शादी में अपने जूते चुराने के लिए गिरफ्तार करवा दिया था.

Arvind KejriwaI @ArvindKejriwaI (अरविंद केजरीवाल का फेक अकाउंट)
मैं इतना ईमानदार हूं कि अंडरवियर नहीं पहनता क्योंकि उसपर वीआईपी लिखा होता है. #YoKejriwalSoHonest

SanKey @giantvoid
#YoKejriwalSoHonest कि दिल्ली में 'यू-टर्न' के बोर्ड को अब 'केजरीवाल-टर्न' के नाम से जाना जाता है.
M @Psilosophy
#YoKejriwalSoHonest कि वह टॉरेंट से भी मूवी डाउनलोड करते हैं तो प्रोड्यूसर को पैसे चुकाते हैं.

Rajneesh Saini #HDL @rajneesh_saini
#YoKejriwalSoHonest कि जब भी वह कहीं बम पाते हैं, तो जाकर टेररिस्ट को लौटा देते हैं.

Bhak Sala
#YoKejriwalSoHonest कि जब उनसे उनके बेटे ने पूछा कि 'आसमान में कितने तारे हैं', उन्होंने सारे तारे गिने और बिल्कुल सही संख्या बताई.

Hardik Rajgor ‏@Hardism
#YoKejriwalSoHonest कि जब राजा हरिश्चंद्र बच्चे थे, तब उनके पिता उन्हें अरविंद केजरीवाल की कहानियां सुनाया करते थे.

Vidyut @Vidyut RT @KaminaPun:
#YoKejriwalSoHonest एक बार उन्होंने हलवाई पर इसलिए केस कर दिया था कि गुलाबजामुन में न तो गुलाब ही था न जामुन.]

कुमार नारद – आपको लेकर आज कल एसएमएस खूब शेयर किये जा रहे हैं. एक एसएमएस है जिसे फेसबुक पर भी काफी लोगों ने शेयर और लाइक किया है.
अरविंद केजरीवाल – अच्छा.

कुमार नारद – इस पर आपकी प्रतिक्रिया चाहूंगा. इसमें लिखा है [Reading SMS on mobile] –
एक बालक जिद पर अड़ गया... बोला कि छिपकली खाउंगा. घरवालों ने बहुत समझाया पर नहीं माना. हार कर उसके गुरु जी को बुलाया गया. वो जिद तुड़वाने में महारथी थे. गुरु के आदेश पर एक छिपकली पकड़वाई गई. उसे प्लेट में परोस बालक के सामने गुरु बोले – ले खा... बालक मचल गया. बोला, तली हुई खाऊंगा. गुरु ने छिपकली तलवाई और दहाड़े, ले अब चुपचाप खा. बालक फिर गुलाटी मार गया और बोला, आधी खाउंगा. छिपकली के दो टुकड़े किये गए. बालक गुरु से बोला, पहले आप खाओ, गुरु ने आंख नाक और भी न जाने क्या क्या भींच कर किसी तरह आधी छिपकली निगली... गुरु के छिपकली निगलते ही बालक दहाड़ मार कर रोने लगा कि आप तो वो टुकड़ा खा गये जो मैंने खाना था. गुरु ने धोती संभाली और वहां से भाग निकले कि अब जरा भी रुका तो ये दुष्ट दूसरा भी टुकड़ा खिला कर मानेगा.
अरविंद केजरीवाल - देखिए सर इस देश में आम आदमी है - ये सब जानता है. ये लोग ऐसा करेंगे. मैं बहुत छोटा आदमी हूं, मेरी कोई औकात नहीं है सर.

[कुमार नारद थोड़ा इंतजार करते हैं, शायद अरविंद केजरीवाल कुछ और बोलें, लेकिन वो बस एक टक देखते हैं – बिलकुल खामोश]

कुमार नारद – आपके बारे में सोशल मीडिया पर किसी ने लिखा है – मैं एक खास ट्वीट का जिक्र करने जा रहा हूं.
अरविंद केजरीवाल – सोशल मीडिया पर तो हमारी टीम खुद ही सब ट्वीट और शेयर करती रहती है. कई बार तो मैं ही आयडिया देता हूं.

कुमार नारद – मैं उस ट्वीट का जिक्र कर रहा हूं जिसमें किसी ने लिखा था – आप First Attempt में IIT में Select हुए. First Attempt में IRS के लिए चुन लिये गये – और फिर First Attempt में ही CM बन गये.
[Pause]
अब Next Attempt - PM के लिए है?
अरविंद केजरीवाल – देखिए सर हमारी कोई औकात नहीं है. हमारे सर्वे भी बताते हैं कि लोग इस बार नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के तौर पर देखना चाहते हैं. मैं बहुत छोटा आदमी हूं.

कुमार नारद – बावजूद इसके आप मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं?
अरविंद केजरीवाल – बिलकुल सर.

कुमार नारद – कैसे करेंगे आप मोदी जी का मुकाबला?
अरविंद केजरीवाल – बड़ा आसान है सर. मैं रोज मोदी से सोलह सवाल पूछूंगा. जानता हूं – अंबानी और अडानी से रिश्तों पर मोदी कभी जवाब नहीं देंगे. जब एक ही दिन में सौ बार पूछूंगा – फिर तो वो सच लगने लगेगा - आम आदमी भी मान लेगा.

कुमार नारद – यानी आप बनारस में दिल्ली दोहराएंगे.
अरविंद केजरीवाल – ये मुश्किल है सर. ये मीडिया वाले बिके हुए हैं. मोदी के लिए अंबानी ने सबको खरीद लिया है.

कुमार नारद – तो फिर, इस बार आप धरतीपकड़ बनेंगे.
अरविंद केजरीवाल – नहीं सर. मैच तो टाई होगा – इस बार टाई होगा – कोई नहीं जीतेगा – पर मैं तो उसे आम आदमी की जीत ही बताऊंगा. तभी तो मोदी जी दो दो जगह से चुनाव लड़ रहे हैं.

कुमार नारद- अब एक ब्रेक लेते हैं. [Looking towards guest – not the camera] मैं अभी आया केजरीवाल जी – आप कहीं मत जाइएगा.
अरविंद केजरीवाल - [Kejriwal whispers] एक बात सुनो सर - ब्रेक के बाद अमेरिका वाला सवाल जरूर पूछना... इससे पाजिटिव संकेत जाएगा.
BREAK 

इसका दूसरा हिस्सा पढ़ें - Fake TALK: केजरीवाल से एक मुलाकात जो हो न सकी [Part - II]

रुख़सत

दस्तक में मैंने एक महात्मा जी का जिक्र किया है. वो महात्मा जी - और उनकी बातें अक्सर एक Resonance Hybrid की तरह याद आ जाते हैं. खासकर उनका गुस्सा.
प्रवचन के बाद प्रसाद मिला. हमउम्र बच्चों के साथ मैं भी घर के अंदर चला गया. वहां प्रसाद के अलावा भी हमें खाने की और चीजें मिलीं. बच्चों को और चाहिये भी क्या. इतने में किसी के चिल्लाने की आवाज सनाई दी. हम लोग और घर के कुछ बड़े भी दौड़े दौड़े बाहर आए.
महात्मा जी बेहद गुस्से में थे.
असल में महात्मा जी को जो हलवा परोसा गया था वो उन्हें जरा भी पसंद नहीं आया.
प्लेट में से थोड़ा हलवा मुट्ठी में लेकर निचोड़ते हुए महात्मा जी बोल रहे थे, ‘ये हलवा है. इसमें से कम से कम दो चम्मच घी निकलना चाहिए. इसमें तो एक बूंद भी नहीं निकल रहा.’
बाकियों की तरह महात्मा जी भी शायद याद नहीं रहते, लेकिन हर इंसान अपनी बात या अपने काम की वजह से जाना जाता है.
वाकई.
जा मा सा माया – जो नहीं है वही माया है.

1 comment:

आपके विचार बहुमूल्य हैं. अपनी बात जरूर रखें: