"सॉरी केजरी भाई, 'थप्पड़ प्रसंग' पर मेरी राय तो आपके बिल्कुल ही उलट है"

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थप्पड़ मारने के आरोपी ऑटोचालक से मुलाकात करते अरविंद केजरीवाल
#‎Kejriwal‬ के इमोशनल प्रचार और प्रोपगंडावादी प्रचार-तंत्र की दाद देनी होगी। इन दिनों उनके सारे समर्थक एक ही तरह के इमोशनल कमेंट फेसबुक पर ठोंके जा रहे हैं- "केजरीवाल को थप्पड़ क्यों मार रहे हो..गोली मार दो। आखिर यही तो है जिसने सांप्रदायिक दंगे करवाए, मंदिर-मस्जिद तोड़े, शहीदों के ताबूत में घोटाले किए, 2जी- 3जी-जीजाजी-कोयला घोटाला किया, यही है जो देश में महंगाई बढ़ा रहा है। इसको सिर्फ थप्पड़ मारकर मत छोड़ो..गोली मार दो! इसके बाद कभी एकाध थप्पड़ मोदी या राहुल को मार कर भी दिखाना..ज़िंदगी बन जाएगी।"

लेकिन इसपर मेरी स्पष्ट राय है कि इस तरह की बातें बकवास के अलावा कुछ नहीं। बल्कि इन्हीं चीज़ों से शक बढ़ता है कि यह सब केजरीवाल की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। एक थप्पड़ खाकर अगर एक करोड़ चंदा इकट्ठा हो जाए, एकाध लाख लोगों की सहानुभूति मिल जाए, गांधी-सुकरात-ईसा वाली छवि मिल सकती हो, तो इस नए राजनीतिज्ञ के लिए यह कोई घाटे का सौदा नहीं रह जाता।
जब से तुम दिल्ली के मुख्यमंत्री बने, तभी से तुमने सुरक्षा-एजेंसियों को पागल-पागल बना रखा है। तुम हीरो की तरह घूमते रहो- "नहीं जी, मुझे तो सुरक्षा नहीं चाहिए", और सारी एजेंसियां तुम्हारे पीछे-पीछे बेवकूफों की तरह घूमती रहें कि केजरी भाई को कोई टच न कर दे। और अगर कोई टच कर देगा, तो तुम और तुम्हारे लोग आसमान को सिर पर उठा लेंगे, राई को पहाड़ बना देंगे, पूरे सिस्टम पूरी दुनिया को फिर से गरियाना चालू कर देंगे।
केजरीवाल ख़ुद Nuisance क्रिएट करने वाली राजनीति कर रहे हैं और इसलिए उनके साथ जो कुछ भी हो रहा है, उसके लिए सिर्फ़ और सिर्फ़ वही ज़िम्मेदार हैं। उनके समर्थक ऐसा प्रचार कर रहे हैं, जैसे जो कुछ हो रहा है, सिर्फ़ उन्हीं के साथ हो रहा है और बाकी नेताओं की आरती उतारी जा रही है। नरेंद्र मोदी की रैली वाली जगह पर तो पटना में बम नहीं फटे थे, पुष्पवर्षा की गई थी! ...और राहुल गांधी के पिता राजीव गांधी के लिए तो श्रीपेरम्बुदूर में स्वर्ग से सात घोड़ों वाली फूलों से सजी सवारी आई थी न, जिसके सारथी स्वयं भगवान सूर्य थे, वहां उनके लिए कोई मानव-बम तो फटा नहीं था!!
अरे, तुम सुरक्षा के न्यूनतम मानकों का भी पालन करोगे नहीं। तुम्हें इस वक़्त वोट चाहिए। तुम्हें दिखावा करना है कि तुम दूसरे राजनीतिज्ञों से अलग हो, बल्कि तुम राजनीतिज्ञ हो ही नहीं, तुम मसीहा हो, फरिश्ते हो, देवदूत हो। तो भैया, बाबा तुलसीदास ने कहा है कि "एक साथ नहीं होई भुआलू, हंसब ठठाई फुलाइब गालू।" तुम सुरक्षा नहीं लेने का नाटक भी करोगे और थप्पड़ खाकर सहानुभूति भी बटोरोगे? दोनों चीज़ें एक साथ कैसे चल सकती हैं भाई?
अरे भैया, भगवान राम की पत्नी सीता ने कौन-से घोटाले किये थे, दंगे करवाए थे, मंदिर-मस्जिद तोड़ी थी? सुरक्षा घेरा टूटा, तो अपराधी (रावण) उन्हें भी उठा ले गया था। लेकिन केजरीवाल इतने बड़े महात्मा हैं कि कोई उन्हें टच भी नहीं कर सकता! जैसे ही टच करेगा, उनकी सच्चाई और ईमानदारी के तेज से उसकी उंगलियां गल-गलकर गिर जाएंगी!! फिर रो क्यों रहे हो कि मेरी जान को ख़तरा है?
पिछले चार महीने से, जब से तुम दिल्ली के मुख्यमंत्री बने, तभी से तुमने सुरक्षा-एजेंसियों को पागल-पागल बना रखा है। तुम हीरो की तरह घूमते रहो- "नहीं जी, मुझे तो सुरक्षा नहीं चाहिए", और सारी एजेंसियां तुम्हारे पीछे-पीछे बेवकूफों की तरह घूमती रहें कि केजरी भाई को कोई टच न कर दे। और अगर कोई टच कर देगा, तो तुम और तुम्हारे लोग आसमान को सिर पर उठा लेंगे, राई को पहाड़ बना देंगे, पूरे सिस्टम पूरी दुनिया को फिर से गरियाना चालू कर देंगे।
ग़ज़ब Hypocrisy (हिपोक्रिसी) है! केजरी भाई, आप जो दिखते हैं, आप वो हैं नहीं। आप जो कहते हैं, वो आपकी असलियत है नहीं। मैं तो आप ही की तरह मोदी का भी आलोचक हूं, लेकिन कोई मोदी, कोई भाजपा इतनी बेवकूफ़ तो मुझे लगती नहीं कि वो अपनी बनी-बनाई बाज़ी आपकी झोली में डाल दे। उन्हें अच्छी तरह पता है कि इन अंडों, थप्पड़ों, मुक्कों, घूंसों से आप ही को फायदा पहुंचेगा, इसलिए ऐसा तो संभव ही नहीं है कि वे ऐसा करवा रहे हों।
इसलिए अपने दामन में झांक कर देखो। जो हो रहा है, वो या तो ख़ुद आप ही के द्वारा प्रायोजित है या फिर आपकी बेवकूफियों और हिपोक्रिसी का नतीजा है।
डिस्क्लेमर - मैं पहले ही केजरीवाल थप्पड़ कांड की निंदा कर चुका हूं, इसलिए कोई यह मतलब न लगाए कि मैं किसी भी रूप में थप्पड़ को जस्टीफाइ कर रहा हूं।
# अभिरंजन कुमार [लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं । ये उनके निजी विचार हैं]

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