मोदी और केजरीवाल में 27 मुख्य अंतर

बनारस में भारत माता के दो सच्चे सपूतों नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल के बीच होने वाले मुक़ाबले में आज से ठीक 27 दिन बाद जनता को अपना फ़ैसला सुनाना है। इसलिए आइए, देख लेते हैं कि इन दोनों नेताओं के बीच 27 मुख्य अंतर क्या-क्या हैं?
1. मोदी सिर्फ़ प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे सुयोग्य उम्मीदवार हैं, जबकि केजरीवाल भारत के सभी सर्वोच्च पदों के लिए सबसे सुयोग्य दावेदार हैं, चाहे वो प्रधानमंत्री का पद हो, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस का पद हो, भारत के जनलोकपाल का पद हो या फिर सीबीआई चीफ का पद ही क्यों न हो।

2. मोदी से बड़ा विकास-पुरुष दुनिया में कोई नहीं है, जबकि केजरीवाल से बड़ा ईमानदार दुनिया में कोई नहीं है।

3. मोदी जहां महादेव के समतुल्य हैं, वहीं केजरीवाल धरती पर फरिश्ते के रूप में उतरे हैं।

4. मोदी की पार्टी के 34 फीसदी उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले हैं, इसलिए उनकी पार्टी चोरों की पार्टी है, जबकि केजरीवाल की पार्टी के सिर्फ़ 16 फीसदी लोगों पर आपराधिक मामले हैं, इसलिए उनकी पार्टी दूध की धुली पार्टी है।

5. मोदी की पार्टी के 74 फीसदी उम्मीदवार करोड़पति हैं, इसलिए उनकी पार्टी ख़ास लोगों की पार्टी है, जबकि केजरीवाल की पार्टी के सिर्फ़ 43 फीसदी उम्मीदवार करोड़पति हैं, इसलिए उनकी पार्टी आम लोगों की पार्टी है।

6. मोदी अंबानी-अडानी समेत सारे पूंजीपतियों को ख़ास आदमी समझकर उनका पूरा ख्याल रखते हैं, जबकि केजरीवाल अंबानी-अडानी को छोड़कर अन्य सभी पूंजीपतियों को आम आदमी समझते हैं।

7. मोदी अगर गैस के दाम कम करवा दें, तो केजरीवाल मोदी के साथ खड़े हो जाएंगे, जबकि केजरीवाल अगर गैस का मुद्दा छोड़ दें, तो भी मोदी उनके साथ खड़े नहीं होंगे।

8. मोदी को भ्रष्ट लोग जमकर चंदा दे रहे हैं, इसलिए भ्रष्टाचार उनके लिए दिखावे का मुद्दा है। केजरीवाल को भ्रष्ट लोग अभी उतना चंदा नहीं दे रहे हैं, इसलिए भ्रष्टाचार उनके लिए भी दिखावे का मुद्दा है।

9. मोदी देश के सबसे अनुभवी और व्यवस्थित तरीके से काम करने वाले तानाशाह हैं, जबकि केजरीवाल देश के सबसे अनुभवहीन और अराजक तरीके से काम करने वाले तानाशाह हैं।

10. मोदी शायद भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाना चाहते हैं, जबकि केजरीवाल शायद भारत को मिडिल ईस्ट बनाना चाहते हैं।

11. मोदी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बैकिंग है, जबकि केजरीवाल को फोर्ड फाउंडेशन की बैकिंग है।

12. मोदी जी आरएसएस वाली भारत माता की जय और वंदे मातरम बोलते हैं, जबकि केजरीवाल साहब एनजीओ वाली भारत माता की जय और वंदे मातरम बोलते हैं।

13. मोदी विकास के चोले में सांप्रदायिक राजनीति करना चाहते हैं और अगर ज़रूरत पड़े तो सांप्रदायिकता के चोले में भी सांप्रदायिक राजनीति कर सकते हैं, जबकि केजरीवाल ईमानदारी के चोले में सांप्रदायिक राजनीति करते हैं और अगर ज़रूरत पड़े तो धर्मनिरपेक्षता के चोले में भी सांप्रदायिक राजनीति करने को तत्पर रहते हैं।

14. मोदी एक आस्तिक हिन्दू हैं और मुसलमानों की टोपी नहीं पहनते, जबकि केजरीवाल ऐसे नास्तिक हैं, जो मौके पर हिन्दू और मौके पर मुसलमान बनने की कला में माहिर हैं।

15. मोदी को बनारस में हिन्दुओं ने वोट नहीं दिया तो हार जाएंगे, जबकि केजरीवाल को बनारस में मुसलमानों ने वोट नहीं दिया, तो हार जाएंगे। इसलिए मोदी की नज़र विशेषकर हिन्दू वोटों पर है, जबकि केजरीवाल की नज़र विशेषकर मुस्लिम वोटों पर है।

16. मोदी गुजरात में दंगा में नहा चुके हैं, जबकि केजरीवाल बनारस में गंगा में नहा चुके हैं।

17. मोदी ने चालाकी से वोटरों को बेवकूफ बनाने में पीएचडी की है, जबकि केजरीवाल ने मासूमियत से वोटरों को बेवकूफ बनाने में मास्टरी की है।

18. मोदी अगर एक बार रात को दिन कह दें, तो किसी भी कीमत पर दोबारा उसे रात नहीं कहेंगे, जबकि केजरीवाल अगर एक बार रात को रात भी कह दें, तो दिव्यज्ञान से अगले ही पल उसे दिन घोषित कर सकते हैं।

19. मोदी एक बार कुर्सी पकड़ लें, तो कुर्सी छोड़ना उन्होंने नहीं सीखा है। केजरीवाल को ज़बर्दस्ती कोई कुर्सी दे भी दें, तो कुर्सी पर बैठना उन्होंने नहीं सीखा है।

20. नरेंद्र मोदी किसी बात पर माफी मांगने को तैयार नहीं होते, जबकि केजरीवाल बात-बात पर माफी मांगते रहते हैं।

21. मोदी ख़ास आदमी हैं, इसलिए कोई उन्हें छू भी नहीं सकता, जबकि केजरीवाल आम आदमी हैं, इसलिए जब-तब थप्पड़ खाते रहते हैं।

22. मोदी सोचते हैं कि हमला करवाना भी होगा तो अपने ऊपर करवाएंगे? जबकि केजरीवाल सोचते हैं कि अपने ऊपर हमला करवा लेने से आदमी को दूसरों के ऊपर हमला करने का मौका मिल जाता है।

23. मोदी को लगता है कि टिप-टॉप रहकर लोगों को आकर्षित किया जा सकता है, जबकि केजरीवाल को लगता है कि उजड़े-उजड़े रहकर जनता को बेवकूफ बनाया जा सकता है।

24. मोदी अपने चुनाव-चिह्न कमल को पोस्टरों और झंडों पर ही रहने देते हैं, जबकि केजरीवाल अपने चुनाव-चिह्न झाड़ू को डंडे की तरह हाथ में लेकर चलते हैं।

25. मोदी का देश पर अहसान यह है कि देश-सेवा के लिए उन्होंने पत्नी को छोड़ दिया, जबकि केजरीवाल का देश पर अहसान यह है कि देश-सेवा के लिए उन्होंने इनकम टैक्स की नौकरी छोड़ दी।

26. मोदी ने चाय वालों को चर्चा दिलाई और कुछ नहीं दिया, जबकि केजरीवाल ने ऑटो वालों को चर्चा दिलाई और कुछ नहीं दिया।

27. मोदी का गुजरात मॉडल उन्हें ज़्यादा से ज़्यादा भारत का प्रधानमंत्री बना सकता है, लेकिन केजरीवाल का दिल्ली मॉडल उन्हें एक दिन अमेरिका का राष्ट्रपति भी बना सकता है।
# अभिरंजन कुमार [लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं । ये उनके निजी विचार हैं]

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