नौटंकी बंद हुई, सबको बधाई!

"ओढ़नी" में भागने से बेहतर था "मफ़लर" में निकलना- यह कैसे? बाद में बताऊंगा। सबसे पहले सबको बधाई। कांग्रेस को, आप को, दिल्ली पुलिस को, मीडिया को, बीजेपी को, दिल्ली की जनता को- सबको। केजरी भाई ने धरना ख़त्म कर दिया। दो दिन की अराजक नौटंकी समाप्त हो गई। अब राहत की लंबी सांस लीजिए और 26 जनवरी की तैयारी शुरू कर दीजिए।
इस पूरी नौटंकी में कांग्रेस एक "थोड़ी सख्त थोड़ी नरम मम्मी" की तरह और आम आदमी पार्टी "थोड़ी ज़िद्दी थोड़ी आज्ञाकारी बिटिया" की तरह नज़र आई। और एक बार फिर यह साबित हो गया कि लोकसभा चुनाव के लिए "भ्रष्ट कांग्रेस" (बकौल केजरीवाल) और "अराजक आप" (यह भी बकौल केजरीवाल ही) का "नेक्सस" कायम हो चुका है।
कांग्रेस की सरकार ने पहले सख्ती दिखाई कि केजरी की ग़लत मांगें नहीं मानी जाएंगी। फिर शिंदे साहब की इज़्ज़त उतरवाने के बाद थोड़ी नरमी भी दिखाई और केजरीवाल को दो छोटे-छोटे "लेमनचूस" थमा दिए। दो पुलिसवालों को जांच पूरी होने तक "पेड लीव" पर भेज दिया। न तो सस्पेंड किया, न तबादला किया। और जो भी किया वो चार के साथ नहीं, बल्कि सिर्फ़ दो के साथ किया। कांग्रेस को केजरीवाल को जितना एक्सपोज़ करना था, कर दिया। जितनी दूर बढ़ाना था, बढ़ा दिया। जहां रोकना था, रोक दिया। इसलिए "बड़ी बधाई" कांग्रेस को।
केजरीवाल जी को तो बधाई देना हमारी मजबूरी है, क्योंकि उन्होंने ख़ुद ही घोषित कर दिया कि दिल्ली की जनता की "बहुत बड़ी जीत" हुई है। रा्ज्य के मुख्यमंत्री, सारे मंत्री, पूरी आम आदमी पार्टी ने दो दिनों तक अपनी सारी ताकत झोंक देने के बाद दो मामूली पुलिसवालों को "पेड लीव" पर भिजवा दिया और इस तरह "बहुत बड़ी जीत" हो गई। पहले कहा था चार को सस्पेंड करो। फिर कहा तबादला ही कर दो। अंत में अपने तकरीबन 10-15 कार्यकर्ताओं के हाथ-पैर तुड़वाने, माथा फुड़वाने और पूरे राज्य की पब्लिक को दो दिन परेशान करने के बाद चार में से दो पुलिस वालों के "पेड लीव" को "बहुत बड़ी जीत" घोषित कर दिया। इसलिए "बहुत बड़ी बधाई" केजरी भाई और आम आदमी पार्टी को।
इसके बाद केजरीवाल जी को तो बधाई देना हमारी मजबूरी है, क्योंकि उन्होंने ख़ुद ही घोषित कर दिया कि दिल्ली की जनता की "बहुत बड़ी जीत" हुई है। रा्ज्य के मुख्यमंत्री, सारे मंत्री, पूरी आम आदमी पार्टी ने दो दिनों तक अपनी सारी ताकत झोंक देने के बाद दो मामूली पुलिसवालों को "पेड लीव" पर भिजवा दिया और इस तरह "बहुत बड़ी जीत" हो गई। पहले कहा था चार को सस्पेंड करो। फिर कहा तबादला ही कर दो। अंत में अपने तकरीबन 10-15 कार्यकर्ताओं के हाथ-पैर तुड़वाने, माथा फुड़वाने और पूरे राज्य की पब्लिक को दो दिन परेशान करने के बाद चार में से दो पुलिस वालों के "पेड लीव" को "बहुत बड़ी जीत" घोषित कर दिया। इसलिए "बहुत बड़ी बधाई" केजरी भाई और आम आदमी पार्टी को।
बधाई दिल्ली पुलिस को भी, क्योंकि उसकी भी नाक बच गई। ख़ुद मुख्यमंत्री और सारे मंत्री मिलकर भी उसके अफसरों का तबादला तक नहीं करा पाए। "पेड लीव" पर जाने से उसके दोनों अफसरों को एक महीने मौज-मस्ती करने का मौका ही मिलेगा। थोड़ा गोवा-सोवा घूम लेंगे बेचारे फैमिली के साथ। वरना तो अभी गणतंत्र दिवस के चक्कर में छुट्टी-वुट्टी सब कैंसिल हो ही जानी थी।
बधाई मीडिया को भी, जिसे दो दिन तक भरपूर टीआरपी मिली। "जो बिकता है, सो दिखता है" वाली फिलॉस्फी पर अमल करते हुए उसने इस नौटंकी को दिन-रात दिखाया और बेचा।
बीजेपी को बधाई इसलिए कि उसके "चाय बेचने वाले" पीएम इन वेटिंग नरेंद्र भाई दामोदर भाई मोदी राहत की सांस ले सकते हैं। अगर केजरी भाई को बड़ी कामयाबी मिल गई होती, तो उनके लिए मुश्किल हो जाती, लेकिन चूंकि वे बुरी तरह एक्सपोज हुए, इसलिए लोकसभा चुनाव में मोदी भाई की उम्मीदें कायम रहेंगी। उनके वोटर अब केजरी के साथ जाने से पहले सौ बार सोचेंगे।
दिल्ली की जनता को भी बधाई, क्योंकि भैया अब आपकी मेट्रो फिर से चल पड़ेगी। आपको ट्रैफिक की समस्या नहीं झेलनी पड़ेगी और गणतंत्र दिवस के दिन अच्छी-अच्छी झांकियां भी देखनो को मिलेंगी। साथ ही समझदार लोग अपने मुख्यमंत्री की हक़ीक़त भी समझ ही गए होंगे।
सबको बधाई दे दी। अब चलते-चलते एक अंदर की बात बता देता हूं। सूत्रों से जो जानकारी मुझे मिल रही है, उसके मुताबिक, आज केंद्र ने केजरी भाई को अच्छी तरह बता दिया था कि जितना माइलेज आपको लेना था, ले चुके, अब यह नौटंकी तत्काल बंद कीजिए, वरना आपको तो सेना से उठवाएंगे ही, आपके कार्यकर्ताओं की भी हड्डी-पसली एक करने का इंतज़ाम कर देंगे और इसकी पूरी ज़िम्मेदारी आपकी होगी। अगर आप दूसरा रामदेव बनना चाहें, तो आपकी मर्ज़ी। चूंकि मफलर की जगह ओढ़नी या दुपट्टा सजाकर भागना नौटंकी की स्क्रिप्ट में जम नहीं रहा था, इसलिए उन्होंने केंद्र के इस स्पष्ट "प्रेम-संदेश" के बाद पुरुषों के कपड़ों में ही वहां से निकलने में भलाई समझी।
# अभिरंजन कुमार [लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं । ये उनके निजी विचार हैं]

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