काँग्रेस, I Love You!

कॉंग्रेस ही एकमात्र ऐसी पार्टी है, जो इस देश का नब्ज़ समझती है। इसीलिये उसने देश के आम से खास लोगों तक "घोटाले का फायदा" पहुंचाया है। घोटाले के कंधों पर बिठाकर विकास को देश में ले आई है। मुझे तो यह सोचकर ही शरीर में सिहरन हो रही है कि अगर घोटाले बंद हो गये, तो इस देश का क्या होगा? और तो और "देश-सेवा की भावना से ओत-प्रोत होकर" राजनीति में भी कौन आएगा?

कॉंग्रेस ही इस देश में अकेली ऐसी पार्टी है, जिसे सही अर्थों में राजनीति की कला आती है। अब देखिए ना! पेड़ बोया, उसे सींचा और बड़ा किया बीजेपी और आरएसएस ने और उसकी टहनी पर बैठकर फल खा रही है कॉंग्रेस पार्टी। कॉंग्रेस, सोनिया और राहुल को गरियाते-गरियाते गुरू अन्ना अब उन्हें समर्थन दे रहे हैं, और शिष्य केजरीवाल उनसे समर्थन ले रहे हैं।
आज मेरा मन कॉंग्रेस पर रीझ रहा है। इतना ज़्यादा कि अगर यह किसी लड़की का नाम होता तो आज मैं उसे सरेआम I LOVE YOU बोल डालता और एलान कर देता- "मेरा हाथ कॉंग्रेस के हाथ।" इसकी कुछ वाजिब वजहें हैं-

पहली कि इस देश में सचमुच अगर कोई ईमानदार और वादे की पक्की पार्टी है, तो वो कॉंग्रेस है। उसने पहले जब कहा था कि "कॉंग्रेस" का हाथ, "आम आदमी" के साथ, तो विरोधियों ने उसका मज़ाक उड़ाया था। लेकिन अब उसने साबित कर दिया है कि अपने वादे को वो आज भी नहीं भूली है और जो कहा था, उसे ईमानदारी से पूरा कर दिखाया।

दूसरी कि इस देश में सचमुच अगर कोई गांधीवादी पार्टी है, तो वो कॉंग्रेस है। गाँधी जी का सिद्धांत था कि कोई एक गाल पर मारे, तो दूसरा गाल भी आगे बढ़ा दो। कॉंग्रेस आज भी इस सिद्धांत का अक्षरशः पालन कर रही है। "आप"की गालियों के बदले वह "आप"को समर्थन देती है। यह एक तरह से घोर गांधीवादी तरीके से "आप"को चुनौती है कि देखते हैं, "आप"से कब तक मुझे गालियाँ मिलती रहेंगी? एक दिन तो "आप"का दिल पिघलेगा और हम "आप"को अपना बना लेंगे।

तीसरी कि इस देश में सचमुच अगर किसी को विकास की इंजीनियरिंग आती है, तो वो कॉंग्रेस पार्टी है। "घोटाले से विकास की अभियांत्रिकी" उसकी अपनी खोज और अपना पेटेंट है और इस देश में इसके अलावा दूसरे किसी तरीके से विकास किया भी नहीं जा सकता। जैसे ही आप "घोटाले का ग्रीस" लगाना बंद कर देंगे, "विकास का पहिया" जाम हो जाएगा। माँ-बाप अपने बच्चों को सरकारी नौकरियों में भेजना बंद कर देंगे। जो लड़के हिम्मत जुटाकर सरकारी नौकरियों में चले भी जाएँगे, उनकी शादियाँ नहीं हुआ करेंगी। देश से मेधा का पलायन बढ़ जाएगा। सरकार की समस्त लोक-कल्याणकारी योजनाएं ठप्प पड़ जाएंगी। ना मनरेगा के लिए मजदूर मिलेंगे, ना आंगनवाड़ी के लिए सेविकाएँ मिलेंगी, ना स्कूलों में पढ़ाने के लिए कॉन्ट्रैक्ट वाले टीचर मिलेंगे। पंचायती राज संस्थाएं बैठ जाएंगी। मुखिया और सरपंच सिर्फ गोली खाने के लिए तो लोग बनेंगे नहीं! सारी सरकारी संस्थाएं भी बैठ जाएंगी। अफसर जनमत सर्वेक्षण करवाने के बाद फाइलों पर दस्तखत किया करेंगे। कोई किसी चीज़ की ठेकेदारी नहीं लेगा। जब मुनाफा खाने को मिलेगा नहीं, तो लोग क्या जूते खाने आएँगे इसमें? नयी सड़कों ओर पुलों का निर्माण ठप्प पड़ जाएगा। पुरानी सड़कों ओर पुलों की मरम्मत रुक जाएगी। देश का इनकम टैक्स समेत हर तरह का टैक्स कलेक्शन कम पड़ जाएगा। और तो और इनकम टैक्स वाले कहीं छापा तक नहीं मारेंगे। लोगों की परचेज़ कैपेसिटी कम हो जाएगी। बड़ी-बड़ी कम्पनियों का भट्ठा बैठ जाएगा। कॉर्पोरेट हाउसेस अपना बोरिया-बिस्तर समेट लेंगी। अभी इतने मुनाफे और सरकार से इतने सपोर्ट और पैकेजेज के बाद जब आए दिन मंदी का रोना और छंटनी का बहाना है, तो उस दिन क्या होगा, जब भ्रष्टाचार का ईंधन मिलना बंद हो जाएगा? लोगों में एंटरप्रेन्योर बनने की प्रेरणा खत्म हो जाएगी। छोटी-छोटी सब्सिडी के अभाव में किसान नयी तकनीक वाली मशीनें खरीदना बंद कर देगा। नयी-नयी फसलों के लिये एक्सपेरिमेंट्स करना बंद कर देगा। खेतों में ट्रॅक्टर्स की घर-घराहट की जगह “दो बैलों की कथा” गूँजने लगेगी।

दरअसल कॉंग्रेस ही एकमात्र ऐसी पार्टी है, जो इस देश का नब्ज़ समझती है। इसीलिये उसने देश के आम से आम लोगों तक "घोटाले का फायदा" पहुंचाया है। घोटाले के कंधों पर बिठाकर विकास को देश में ले आई है। मुझे तो यह सोचकर ही शरीर में सिहरन हो रही है कि अगर घोटाले बंद हो गये, तो इस देश का क्या होगा? और तो और "देश-सेवा की भावना से ओत-प्रोत होकर" राजनीति में भी कौन आएगा? तब तो जब कोई माँ रो-रोकर अपने बेटे से कहेगी कि “बेटे, सत्ता एक ज़हर है!” तो बेटा कहेगा- “हाँ माँ, तुम सच कहती हो, अब मैं भी यह ज़हर नहीं पीना चाहता और तुम कहो तो कल सुबह ही पहली फ्लाइट से मैं स्विट्ज़र्लॅंड चला जाता हूँ।“

चौथी कि कॉंग्रेस ही इस देश में एकमात्र ऐसी पार्टी है, जो समग्रतावादी सोच और नीतियाँ रखती है। अपने एक हाथ से वह व्यापारियों और उद्योगपतियोँ को महंगाई का शोषण-यंत्र देती है, तो दूसरे हाथ से किसानों को कर्ज़माफी और गरीबों को फूड-सिक्योरिटी जैसा भुखमरी से बचने का मंत्र देती है। एक हाथ से उसने बाज़ार के द्वार खोले, दूसरे हाथ से संस्कृति का घूंघट भी उतारने की हसरत रखती है। समलैंगिकों के लिए उसकी मोहब्बत लैला और मजनूँ की मोहब्बत की तरह मिसाल है।

पांचवीं कि कॉंग्रेस ही इस देश कि अकेली ऐसी पार्टी है, जिसके भीतर इतना प्रगाढ़ लोकतंत्र है कि इसमें दो अत्यंत विरोधी विचार भी एक दूसरे को सहते हुए, झेलते हुए और सबसे बड़ी बात सम्मान करते हुए बड़े ही प्यार से रहते हैं। मसलन, इसमें एक दिन पीएम और उनकी पूरी कॅबिनेट एक अध्यादेश लाती है और दूसरे दिन सुपर-पीएम के जिगर का टुकड़ा मचल उठता है- "मैं तो इसे फाड़ ही डालूंगा।" और सचमुच वह अध्यादेश फाड़ दिया जाता है। इस पार्टी में ऐसा तगड़ा लोकतंत्र है कि इसमें ना सिर्फ पार्टी और देश के भीतर की आवाज़, बल्कि इटली और अमेरिका तक की आवाज़ सुनी जाती है।

छठी कि कॉंग्रेस ही इस देश में अकेली ऐसी पार्टी है, जिसे सही अर्थों में राजनीति की कला आती है। अब देखिए ना! पेड़ बोया, उसे सींचा और बड़ा किया बीजेपी और आरएसएस ने और उसकी टहनी पर बैठकर फल खा रही है कॉंग्रेस पार्टी। कॉंग्रेस, सोनिया और राहुल को गरियाते-गरियाते गुरू अन्ना अब उन्हें समर्थन दे रहे हैं, और शिष्य केजरीवाल उनसे समर्थन ले रहे हैं।

और सातवीं… सबका लब्बो-लुआब ये कि कॉंग्रेस ही इस देश में अकेली ऐसी पार्टी है, जो सच्चे अर्थों में खिलाड़ी है। बाकी सभी उसके मोहरे हैं। इसीलिए उसे देखकर आज मेरा जी एक महान बॉलीवुड फिल्म “मोहरा” का यह कालजयी गीत गाने को कर रहा है-
“तू चीज़ बड़ी है मस्त-मस्त!
तू चीज़ बड़ी है मस्त!
नहीं तेरा कोई दोष-दोष...”

“आप” और आप भी गाइये, बड़ा ही मस्त गाना है-
“तू चीज़ बड़ी है मस्त-मस्त!
तू चीज़ बड़ी है मस्त!

नहीं तेरा कोई दोष-दोष...”

# अभिरंजन कुमार  [लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं । ये उनके निजी विचार हैं]

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